पुलिस ने इस मामले में यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण (POCSO) अधिनियम की धाराएं 9(1), 10 और 21(2) के तहत मामला दर्ज किया है। ये धाराएं क्रमशः यौन उत्पीड़न, गंभीर हमले के लिए सजा और संस्थागत प्रमुख द्वारा अपराध की सूचना न देने से संबंधित हैं। इसके अलावा, भारतीय दंड संहिता की धारा 342 (गलत तरीके से कारावास) भी इसमें जोड़ी गई है। शिकायतकर्ता का यह भी दावा है कि उन्होंने जग्गी वासुदेव को कई ईमेल लिखकर सहायता की मांग की थी, लेकिन उन्हें कोई उत्तर नहीं मिला।
प्राथमिकी दर्ज होने से पहले, अक्टूबर 2024 में पीड़िता के माता-पिता ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इस पूरे मामले को सार्वजनिक किया था। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्होंने स्कूल प्रशासन को शिकायत दी थी, लेकिन उन्हें कोई सहयोग नहीं मिला। इसके बाद उन्होंने पुलिस में ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराई थी, लेकिन एफआईआर तीन महीने बाद 31 जनवरी को दर्ज की गई। पीड़ित परिवार को एफआईआर की कॉपी मार्च के अंत में सौंपी गई।
स्क्रॉल डॉट इन से बातचीत में पीड़िता की मां ने दावा किया कि प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद से उन्हें लगातार उत्पीड़न और धमकियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा, “जब से मैंने प्रेस मीट की है, तब से मेरी जान को खतरा बना हुआ है और मुझे मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है।”





