दिल्ली में गहराया संवैधानिक संकट
राष्ट्रपति को दिए गए ज्ञापन में कहा गया है कि दिल्ली सरकार छठे वित्त आयोग का गठन करने में विफल रही, जो अप्रैल 2021 से लंबित है। दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार के चलते संवैधानिक संकट गहरा गया है। प्रशासनिक व्यवस्था पूरी तरह से ख़राब हो गई हैं। दिल्ली सरकार में एक के बाद एक कई अनियमितताएं हो रही है। बीजेपी विधायकों ने कहा कि दिल्ली में आयुष्मान भारत योजना भी लागू नहीं हुई और हज़ारो करोड़ो रूपए का फंड बंद हो गया। इसका कारण एक ही है की मुख्यमंत्री जेल में बंद है, इसलिए सरकार काम नहीं कर रही।
इस मामले पर दिल्ली में बीजेपी के विधायक विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि ज्ञापन गृह सचिव को भेज दिया गया है। अब वह इसे कानूनी राय लेने के बाद राष्ट्रपति को वापस भेजेंगे। विजेंद्र ने कहा कि भाजपा के विधायकों ने 30 अगस्त को राष्ट्रपति से मुलाकात की थी और ज्ञापन सौंपा था। मंगलवार को मीडिया से बात करते हुए गुप्ता ने कहा, “दिल्ली में सरकार नाम की कोई चीज नहीं है, गवर्नेंस परैलिसिस है। हमने देखा कि थोड़ी सी बरसात में लोगों की मौत हो रही है। जलभराव हो रहा है, सड़कें टूटी हैं। पूरा गवर्नेंस भ्रष्टाचार में ग्रस्त है। एक के बाद एक घोटाले सामने आ रहे हैं। मुख्यमंत्री जेल में हैं और जेल से सरकार चलाने की बात कर रहे हैं, पूरी तरह अराजकता है।”
वहीं, मामले पर आम आदमी पार्टी के नेता संजय सिंह ने जवाब देते हुए कहा कि बीजेपी यह तय कर ले की उसे दिल्ली में कब हराना है। संजय ने मीडिया से बातचीत में ज्ञापन गृह सचिव को भेजने पर कहा, “भाजपा यह तय कर ले कि उन्हें अभी हराना है या चार महीने बाद अगर भाजपा को हरने की जल्दी है तो अभी चुनाव की तारीख घोषित कर दे।” गौरतलब है कि दिल्ली के मुख्यमंत्री कथित शराब घोटाले में 21 मार्च को गिरफ्तारी के बाद से ही जेल में बंद हैं। सीबीआई केस में उनकी जमानत याचिका पर फैसला लंबित है। हालांकि, ईडी केस में सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें अंतरिम जमानत दी है, लेकिन सीएम कार्यालय जाने पर रोक लगा दी है।





