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दिल्ली की कानून-व्यवस्था पर गृह मंत्री अमित शाह की उच्च स्तरीय बैठक, CM रेखा गुप्ता भी रहीं मौजूद

इस बैठक में दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, गृह मंत्री आशीष सूद, दिल्ली सरकार के वरिष्ठ अधिकारी, केंद्रीय गृह सचिव और आईबी प्रमुख समेत गृह मंत्रालय के |

दिल्ली की कानून-व्यवस्था पर गृह मंत्री अमित शाह की उच्च स्तरीय बैठक, CM रेखा गुप्ता भी रहीं मौजूद
फोटो: Amit Shah
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को राष्ट्रीय राजधानी में कानून व्यवस्था की समीक्षा के लिए एक अहम बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक में दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, गृह मंत्री आशीष सूद, दिल्ली सरकार के वरिष्ठ अधिकारी, केंद्रीय गृह सचिव और आईबी प्रमुख समेत गृह मंत्रालय के अन्य अधिकारी शामिल हुए। 

बैठक का मुख्य उद्देश्य नवगठित दिल्ली सरकार और दिल्ली पुलिस के बीच समन्वय को मजबूत करना और राजधानी में कानून-व्यवस्था से जुड़े उभरते खतरों से निपटने के लिए पुलिसिंग रणनीतियों को सुदृढ़ करना था। शाह लंबे समय से राष्ट्रीय राजधानी की सुरक्षा स्थिति की बारीकी से निगरानी कर रहे हैं और कई मौकों पर दिल्ली में एक प्रभावी और सशक्त कानून प्रवर्तन तंत्र की आवश्यकता को रेखांकित कर चुके हैं। दिल्ली की नवनिर्वाचित मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, जो शालीमार बाग से भाजपा की पहली विधायक हैं, ने 20 फरवरी को चौथी महिला मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी। उनकी सरकार के गठन के बाद यह पहली बड़ी बैठक थी, जिसमें कानून व्यवस्था को प्राथमिकता दी गई। 

इससे पहले, 18 फरवरी को गृह मंत्री अमित शाह ने जम्मू-कश्मीर की कानून-व्यवस्था को लेकर भी एक महत्वपूर्ण बैठक की थी। इस बैठक में केंद्र शासित प्रदेश के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और उपराज्यपाल मनोज सिन्हा शामिल थे।  बैठक में शाह ने अप्रैल 2025 तक जम्मू-कश्मीर में नए आपराधिक कानूनों के पूर्ण कार्यान्वयन और अनुपस्थिति में मुकदमा प्रावधानों को लागू करने की आवश्यकता पर बल दिया था। 

 अमित शाह ने जम्मू-कश्मीर प्रशासन को तीन नए आपराधिक कानूनों—भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023; भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023; और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA), 2023—के तहत त्वरित न्याय सुनिश्चित करने के लिए तकनीक के अधिकतम उपयोग का निर्देश दिया। ये तीनों कानून भारतीय दंड संहिता (IPC), आपराधिक प्रक्रिया संहिता (CrPC) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम की जगह ले चुके हैं। गृह मंत्री ने यह भी निर्देश दिया कि जम्मू-कश्मीर में इन कानूनों के कार्यान्वयन की प्रगति की नियमित समीक्षा की जानी चाहिए। मुख्यमंत्री स्तर पर मासिक समीक्षा, मुख्य सचिव स्तर पर पाक्षिक समीक्षा और पुलिस महानिदेशक स्तर पर साप्ताहिक समीक्षा की जानी चाहिए, ताकि इन कानूनों का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित हो सके।

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