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पश्चिम बंगाल को मनरेगा फंड न देने पर हाईकोर्ट सख्त, केंद्र से मांगा स्पष्टीकरण

कलकत्ता उच्च न्यायालय ने गुरुवार को केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि वह पश्चिम बंगाल को मनरेगा के अंतर्गत पिछले कुछ वर्षों से बंद फंड के वितरण पर तीन |

पश्चिम बंगाल को मनरेगा फंड न देने पर हाईकोर्ट सख्त, केंद्र से मांगा स्पष्टीकरण
फोटो: पश्चिम बंगाल को मनरेगा फंड न देने पर हाईकोर्ट सख्त, केंद्र से मांगा स्पष्टीकरण
कलकत्ता उच्च न्यायालय ने गुरुवार को केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि वह पश्चिम बंगाल को मनरेगा (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम) के अंतर्गत पिछले कुछ वर्षों से बंद फंड के वितरण पर तीन सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करे। मुख्य न्यायाधीश टी.एस. शिवगनम और न्यायमूर्ति हिरण्मय भट्टाचार्य की खंडपीठ ने यह आदेश सीपीएम समर्थित ‘पश्चिम बंग खेत मजदूर समिति’ की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। याचिका में आरोप लगाया गया कि राज्य के ग्रामीण श्रमिकों को 100 दिन की गारंटीड रोजगार योजना के अंतर्गत वैधानिक लाभ नहीं मिल रहे हैं। सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने स्पष्ट रूप से कहा, "हम सिर्फ यह जानना चाहते हैं कि क्या केंद्र सरकार किसी कारणवश राज्यों को फंड देने से इनकार कर सकती है?" उन्होंने ग्रामीण विकास मंत्रालय के सचिव को व्यक्तिगत रूप से तीन सप्ताह में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया।

केंद्र और राज्य में आरोप-प्रत्यारोप


राज्य सरकार की ओर से पेश वकील ने अदालत को बताया कि बार-बार अनुरोध करने के बावजूद केंद्र फंड जारी नहीं कर रहा है। दूसरी ओर, अतिरिक्त महाधिवक्ता अशोक चक्रवर्ती ने फंड दुरुपयोग का हवाला देते हुए कहा कि पूर्वी बर्दवान, हुगली, मालदा और दार्जिलिंग जिलों में जांच के दौरान 5.37 करोड़ रुपये में से 2.39 करोड़ रुपये के गबन की बात सामने आई थी। हालांकि, याचिकाकर्ता संगठन के अधिवक्ता विकास रंजन भट्टाचार्य ने कहा, "दुरुपयोग की गई राशि की वसूली की जा चुकी है और उसे केंद्र को वापस भेजा गया है।"

अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 15 मई को तय की है, जिसमें केंद्र की रिपोर्ट पर विचार किया जाएगा। इस घटनाक्रम ने सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) को राजनीतिक संबल दिया है, जो लंबे समय से यह आरोप लगाती रही है कि केंद्र जानबूझकर बंगाल के गरीबों को वंचित कर रहा है। राज्य सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, "हमने केंद्र द्वारा दिए गए सभी निर्देशों का पालन किया है। अब देखना होगा कि केंद्र अदालत में क्या दलील देता है।"

वहीं, भाजपा का दावा है कि फंड रोकने का निर्णय गलत नहीं था, क्योंकि राज्य प्रशासन ब्लॉक और पंचायत स्तर पर फंड गबन में लिप्त लोगों से वसूली नहीं कर सका। भाजपा नेता ने कहा, "केंद्र ने पहले ही राज्य से सभी गबन की गई राशि की वसूली करने को कहा था, जो नहीं हो सका।" पंचायत विभाग के सूत्रों ने खुलासा किया कि इस वित्त वर्ष में केंद्र ने बंगाल के लिए कोई श्रम बजट स्वीकृत नहीं किया है, जिससे यह संकेत मिलता है कि मौजूदा वर्ष में भी राज्य को फंड नहीं मिलेगा।