जिन नेताओं को पार्टी से निकाला गया, इनमें कलायत विधानसभा सीट से टिकट कटने से निर्दलीय चुनाव लड़ रही अनीता ढुल, पानीपत ग्रामीण से विजय जैन, आरक्षित सीट गुहला से नरेश ढांडे, जींद से प्रदीप गिल, पुंडरी से सज्जन सिंह ढुुल और सुनीता बट्टन, आरक्षित विधानसभा सीट निलोखेरी से राजीव गोंदर और दयाल सिंह सिरोही, उचानां कलां से दिलबाग संडील, दादरी से अजीत फोगाट, भिवानी से अभिजीत सिंह, आरक्षित सीट बवानी खेड़ा से सतवीर रतेड़ा और पृथला विधानसभा से नीत मान का नाम शामिल है।
गौर करने वाली बात है कि ऐसा पहली बार नहीं है कि कांग्रेस ने हरियाणा में चुनावी माहौल के बीच बागियों को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाया है। इससे पहले गुरुवार को पार्टी ने तीन और नेताओं को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाया था। तिगांव विधानसभा सीट से टिकट की माँग कर रहे ललित नागर को भी छह साल के लिए निष्कासित कर दिया। ललित नागर इस सीट से निर्दलीय चुनाव लड़ रहे थे, जबकि पार्टी ने यशपाल नागर के बेटे रोहित नागर को तिगांव से टिकट दिया है। इसके अलावा चित्रा सरवारा और राकेश जून पर कार्रवाई करते हुए पार्टी ने उन्हें छह साल के लिए निष्कासित कर दिया। चित्रा अंबाला कैंट से निर्दलीय चुनाव लड़ रही थी, जबकि बहादुरगढ़ सीट से टिकट कटने पर राकेश पार्टी से नाराज़ बताए जा रहे थे।
पार्टी के लिए आसान नहीं था प्रतिनिधियों का चुनाव
कांग्रेस अपने प्रत्याशियों को उनके प्रदर्शन और परिस्थितियों के आधार पर टिकट दे रही है। ऐसे में कई ऐसे नेताओं को टिकट नहीं मिल सका है, जिनकी उम्मीदवारी को लेकर क्षेत्रों में चर्चा थी। ललित नागर 2014 से 2019 के बीच विधायक रहे हैं, पार्टी ने उन्हें प्रदेश के 2019 के विधानसभा चुनाव में दोबारा मौक़ा दिया था, लेकिन ललित को बीजेपी प्रत्याशी राजेश नागर से हार का सामना करना पड़ा। हाल ही में ललित नागर का एक वीडियो भी वायरल हुआ था, जिसमें वह टिकट न मिलने की वज़ह से फूट-फूटकर रो रहे है। उन्होंने कहा कि उनके साथ धोखा हुआ है। उन्होंने विधायक रहते हुए क्षेत्र के विकास में कोई कमी नहीं रहने दी, फिर भी पार्टी ने उन्हें टिकट नहीं दिया।
ललित ने निर्दलीय चुनाव लड़ने का कारण बताते हुए कहा था कि 36 बिरादरियों के कहने पर वह चुनाव लड़ रहे है।





