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हरियाणा बना ISI नेटवर्क का गढ़? ऑपरेशन सिंदूर के बाद तीसरी गिरफ्तारी

भारत द्वारा पाकिस्तान के खिलाफ चलाए गए रणनीतिक सैन्य अभियान 'ऑपरेशन सिंदूर' के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने अब देश के भीतर छिपे उन संदिग्ध तत्वों पर शिकंजा |

हरियाणा बना ISI नेटवर्क का गढ़? ऑपरेशन सिंदूर के बाद तीसरी गिरफ्तारी
फोटो: हरियाणा बना ISI नेटवर्क का गढ़? ऑपरेशन सिंदूर के बाद तीसरी गिरफ्तारी
भारत द्वारा पाकिस्तान के खिलाफ चलाए गए रणनीतिक सैन्य अभियान 'ऑपरेशन सिंदूर' के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने अब देश के भीतर छिपे उन संदिग्ध तत्वों पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है, जो गुप्त रूप से दुश्मन राष्ट्र के लिए जासूसी कर रहे थे या उसके इशारों पर काम कर रहे थे। इस अभियान के चलते अब हरियाणा राज्य विशेष रूप से एजेंसियों के रडार पर आ गया है, जहां से एक के बाद एक गिरफ्तारियां हो रही हैं। ताजा मामला हरियाणा के नूंह जिले के तावड़ू सब-डिवीजन से सामने आया है, जहां कंगारका गांव में छिपकर रह रहा एक व्यक्ति — तारिफ — को पुलिस और केंद्रीय खुफिया एजेंसियों ने संयुक्त रूप से गिरफ्तार किया है। 

तारिफ पर पाकिस्तान के लिए संवेदनशील जानकारियां एकत्र करने और उन्हें साझा करने का गंभीर आरोप है। यह हरियाणा से अब तक की तीसरी, जबकि नूंह जिले से दूसरी गिरफ्तारी है, जो राज्य में देशविरोधी गतिविधियों की संभावित जड़ों की ओर इशारा करती है। इससे पहले हिसार से यूट्यूबर ज्योति मल्होत्रा को पाकिस्तान के लिए कथित रूप से जासूसी करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था, वहीं नूंह से ही अरमान नामक एक और युवक की गिरफ्तारी हो चुकी है। इन तीनों मामलों के तार एक विस्तृत जासूसी नेटवर्क की ओर इशारा करते हैं, जो पड़ोसी देश की खुफिया एजेंसी के संपर्क में था। तारिफ की गिरफ्तारी के बाद तावड़ू सदर थाने में उसके खिलाफ औपचारिक प्राथमिकी दर्ज की गई है। खास बात यह है कि इस मामले में केवल तारिफ ही नहीं, बल्कि पाकिस्तान के उच्चायोग (हाई कमीशन) में तैनात दो अधिकारियों के खिलाफ भी मामला दर्ज किया गया है। 

इससे यह स्पष्ट होता है कि यह केवल व्यक्तिगत जासूसी का मामला नहीं, बल्कि एक गहरी और संगठित साजिश का हिस्सा है, जिसमें विदेश से संचालित नेटवर्क भी सक्रिय रूप से संलिप्त हैं। सूत्रों के अनुसार, शुरुआती जांच में यह संकेत मिले हैं कि तारिफ को पाकिस्तान की ओर से वित्तीय सहायता भी दी जा रही थी, और उसके जिम्मे भारत के संवेदनशील क्षेत्रों की गतिविधियों पर नजर रखना और उन्हें रिपोर्ट करना था। एजेंसियों को शक है कि उसने कुछ सूचनाएं पहले भी भेजी हैं, जिसकी पुष्टि साइबर फॉरेंसिक जांच से की जा रही है। इस तरह की गिरफ्तारियां यह दर्शाती हैं कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत की खुफिया और सुरक्षा एजेंसियों ने अपने अभियान का दायरा अब सीमाओं से भीतर तक फैला दिया है। अब केवल सीमा पार से आने वाले खतरों को ही नहीं, बल्कि देश के अंदर मौजूद उन लोगों को भी निशाने पर लिया जा रहा है, जो देश की अखंडता और सुरक्षा के लिए खतरा बन चुके हैं।