प्रशांत किशोर ने एक साक्षात्कार में 'आप' की हार की मुख्य वजहों पर चर्चा करते हुए कहा कि पार्टी की हार गवर्नेंस, गठबंधन नीति और अरविंद केजरीवाल के इस्तीफे से संबंधित गलत फैसलों के कारण हुई। उन्होंने कहा, "आप कभी भी एक काडर-बेस पार्टी नहीं रही। यह एक आंदोलन से निकली पार्टी थी, जिसे जनता ने जितवाया। यह एक वॉलंटियर-ड्रिवन पार्टी थी, जहां समर्थक चुनाव के समय वॉलंटियर बनकर पार्टी का समर्थन करते थे। पार्टी का कोई स्थायी और प्रतिबद्ध काडर नहीं था।" उन्होंने यह भी बताया कि पार्टी ने एक नई तरह की राजनीति को दर्शाया था, जिसे लोगों ने तवज्जो दी और पार्टी को सफलता मिली।
प्रशांत किशोर ने 'आप' की हार के कारणों की और विस्तार से चर्चा की और कहा, "गवर्नेंस में कमी के कारण एंटी-इंकारबेंसी का माहौल बना था। इस बार शिक्षा के अलावा कोई बड़ा सुधार जनता को दिखा नहीं। पिछले मॉनसून में दिल्ली में जलभराव की समस्या, मोहल्ला क्लिनिकों का ढहना, यमुना पर किए गए वादों का पूरा न होना, और पॉल्यूशन जैसी समस्याओं का समाधान न होना—इन सभी चीजों ने लोगों के जीवन को प्रभावित किया और पार्टी की छवि को धूमिल किया।"
उन्होंने आगे कहा, "पार्टी को गठबंधन की नीति को लेकर स्पष्टता नहीं थी। कभी आप इंडिया गठबंधन का हिस्सा बनते थे, कभी नहीं। इससे पार्टी की पोजिशनिंग कमजोर हुई और पार्टी के समर्थन का बड़ा वर्ग नाराज हो गया। जो लोग मोदी के खिलाफ थे और केजरीवाल को समर्थन देते थे, वे अब आप से नाराज हो गए। पार्टी के लिए यह उलटा साबित हुआ।"
प्रशांत किशोर ने यह भी कहा कि केजरीवाल का इस्तीफा लेने का निर्णय गलत समय पर लिया गया, जिसके कारण पार्टी को दोतरफा नुकसान हुआ। उन्होंने इसे एक 'ब्लंडर' करार दिया और कहा, "जब केजरीवाल पर शराब घोटाले का आरोप आया था, तब उन्हें जेल जाने से पहले इस्तीफा दे देना चाहिए था। इस कदम से उनका हाई मोरल ग्राउंड मजबूत हो सकता था और लोग यह मानते कि वह एक ईमानदार नेता हैं जो अपने पद से इस्तीफा दे देते हैं यदि उन पर आरोप लगे। लेकिन जब उन्होंने बाद में इस्तीफा दिया, तो वह वर्ग भी नाराज हो गया जो चाहता था कि केजरीवाल मुख्यमंत्री बने रहें।"
अंत में, प्रशांत किशोर ने कहा कि 'आप' के तीन प्रमुख फैसलों—गवर्नेंस, राजनीतिक पोजिशनिंग और इस्तीफे के संदर्भ में जो अस्पष्टता रही, वह पार्टी की हार का प्रमुख कारण बनी। उनके मुताबिक, पार्टी को इन मामलों में स्पष्ट रणनीति अपनानी चाहिए थी, जिससे शायद चुनावी परिणाम कुछ और हो सकते थे।
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