'हमें स्पष्ट जवाब चाहिए' – सुप्रीम कोर्ट
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने टिप्पणी की, "हम वित्त मंत्रालय और गृह मंत्रालय की रिपोर्ट चाहते हैं। हमें स्पष्ट जवाब चाहिए कि किन पक्षों को ठेके दिए गए, प्रक्रिया क्या अपनाई गई, और यदि टेंडर प्रक्रिया नहीं अपनाई गई, तो उसका कारण क्या है।"
बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट ने अरुणाचल प्रदेश सरकार और भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) से भी इस मामले पर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है। अदालत ने निर्देश दिया कि अगली सुनवाई 21 जुलाई को होगी, जिसमें अरुणाचल प्रदेश सरकार को यह स्पष्ट करना होगा कि किन पक्षों को अनुबंध दिए गए, और क्या वे याचिका में उल्लिखित ठेकों से जुड़े हैं।
इसके अलावा, वित्त और गृह मंत्रालय को विस्तृत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया गया है, जिसमें ठेका आवंटन से संबंधित सभी विवरण प्रस्तुत किए जाएंगे। कोर्ट ने CAG को भी निर्देश दिया कि वे हर अनुबंध का विवरण और जिन व्यक्तियों को ठेके दिए गए, उनकी जानकारी अदालत को सौंपें।
पेमा खांडू पर क्या हैं आरोप?
यह मामला सुप्रीम कोर्ट में दायर एक जनहित याचिका (PIL) से संबंधित है, जिसमें अरुणाचल प्रदेश में ठेका आवंटन में कथित अनियमितताओं की केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) या विशेष जांच दल (SIT) से जांच कराने की मांग की गई है।
याचिकाकर्ता सेव मोन रीजन फेडरेशन की ओर से अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने कोर्ट में दलील दी कि राज्य सरकार को "एक निजी लिमिटेड कंपनी की तरह" चलाया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि "सभी सरकारी ठेके मुख्यमंत्री पेमा खांडू के परिवार के सदस्यों और उनके करीबी सहयोगियों की कंपनियों को दिए गए।"
जब कोर्ट ने पूछा कि कुल कितने अनुबंध दिए गए हैं, तो प्रशांत भूषण ने जवाब दिया, "सैकड़ों… और ये सैकड़ों करोड़ के ठेके हैं। अकेले मुख्यमंत्री की पत्नी की कंपनियों को ही 70 ठेके दिए गए हैं।"
अरुणाचल प्रदेश सरकार का पक्ष रखते हुए, सरकारी वकील ने इस जनहित याचिका को "कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग" करार दिया। उन्होंने दलील दी कि CAG ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया है कि अरुणाचल प्रदेश की स्थितियां अलग हैं और सरकार कानून के तहत काम कर रही है।
उन्होंने आगे कहा, "यह एक राजनीति से प्रेरित याचिका है। याचिकाकर्ता कुछ लोगों का छोटा समूह है, जो राज्य में विकास कार्य नहीं चाहते।"
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने भारत के अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी से स्पष्ट किया कि इस मामले में केंद्रीय मंत्रालयों को अपना पक्ष रखना जरूरी है।
याचिका में दावा किया गया है कि मुख्यमंत्री पेमा खांडू की पत्नी के स्वामित्व वाली निर्माण कंपनी मेसर्स ब्रांड ईगल्स को हितों के स्पष्ट टकराव के बावजूद भारी मात्रा में सरकारी ठेके दिए गए।
याचिकाकर्ता के मुताबिक, जब पेमा खांडू के पिता, स्वर्गीय दोरजी खांडू अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री थे, तब यह कंपनी पेमा खांडू के नाम पर थी। आरोप है कि बिना किसी टेंडर प्रक्रिया के कंपनी को करोड़ों के ठेके मिले।
इसके अलावा, याचिका में दोरजी खांडू की दूसरी पत्नी रिनचिन ड्रेमा और मुख्यमंत्री के भतीजे त्सेरिंग ताशी को भी प्रतिवादी बनाया गया है। ताशी तवांग जिले के विधायक हैं और मेसर्स अलायंस ट्रेडिंग कंपनी के मालिक हैं। याचिकाकर्ता का आरोप है कि भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और मंत्रियों के लिए आचार संहिता का उल्लंघन करते हुए इस कंपनी को भी कई सरकारी ठेके दिए गए।
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