गडकरी से मुलाकात, बुनियादी ढांचे पर चर्चा
एआईपी के प्रवक्ता इनाम-उन-नबी ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि सांसद राशिद ने संसद कक्ष में नितिन गडकरी से मुलाकात की। इस बैठक में करनाह, केरन, माछिल और गुरेज की बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को लेकर चर्चा हुई। गडकरी ने उन्हें आश्वासन दिया कि करनाह सुरंग की प्रक्रिया पहले ही शुरू हो चुकी है और अन्य प्रस्तावित सुरंगों व सड़कों को रक्षा मंत्रालय के समक्ष विचारार्थ रखा जाएगा। इसके अलावा, राशिद ने उत्तरी कश्मीर में राष्ट्रीय राजमार्गों और सड़क बुनियादी ढांचे के उन्नयन के लिए 200 करोड़ रुपये की मांग भी की।
संसद में भाग लेने के लिए मिली थी पैरोल
दिल्ली हाई कोर्ट ने सोमवार को राशिद को दो दिन की पैरोल दी थी ताकि वे संसद के बजट सत्र में भाग ले सकें। उन्हें मंगलवार और गुरुवार को संसद में उपस्थित होने की अनुमति दी गई, लेकिन कुछ सख्त शर्तों के साथ। उन्हें मोबाइल फोन या इंटरनेट का उपयोग करने की अनुमति नहीं थी और वे मीडिया या किसी अन्य व्यक्ति से बात नहीं कर सकते थे, सिवाय उन लोगों के जो उनके सांसद के कर्तव्यों के लिए आवश्यक थे।
राशिद की पार्टी के प्रवक्ता नबी ने स्पष्ट किया कि यह बैठक पूरी तरह से अपने निर्वाचन क्षेत्र के विकास को लेकर थी, न कि किसी राजनीतिक मकसद से। उन्होंने कहा, "राशिद ने राजनीति के लिए यह मुलाकात नहीं की, बल्कि अपने क्षेत्र के लोगों के लिए की, जो छह महीने तक बर्फबारी के कारण बाहरी दुनिया से कटे रहते हैं। इन क्षेत्रों में सड़क सुरंगों की मांग कौन करेगा, अगर उनके प्रतिनिधि नहीं?"
सुरंगों और सड़क संपर्क पर जोर
बैठक में उत्तरी कश्मीर के विकास के लिए प्रमुख बुनियादी ढांचे की जरूरतों पर चर्चा हुई, जिससे लोगों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति में सुधार होगा और राष्ट्रीय एकता मजबूत होगी। चर्चा के दौरान राशिद ने करनाह, माछिल और गुरेज सुरंगों के निर्माण की जोरदार वकालत की, क्योंकि भारी बर्फबारी के कारण ये क्षेत्र हर साल लगभग छह महीने तक देश के अन्य हिस्सों से कटे रहते हैं।
इसके अलावा, राशिद ने लोलाब-बांदीपुरा सड़क संपर्क परियोजना पर भी जोर दिया, जिससे लोलाब घाटी को बांदीपुरा जिले से जोड़ा जा सके। उन्होंने ताकीपोरा लोलाब-सोपोर सड़क की आवश्यकता पर भी प्रकाश डाला, जिससे क्षेत्रीय संपर्क बढ़ेगा और व्यापार एवं परिवहन को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।
इस मुलाकात के बाद राशिद की पैरोल समाप्त हो गई और उन्हें वापस जेल भेज दिया गया।
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