राहुल गाँधी ने क्या कहा
नामांकन से पहले राहुल गाँधी ने कहा था, “कल केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह जी ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे जी से फ़ोन पर बता की थी। राजनाथ सिंह जी ने कहा कि आप हमारे स्पीकर पद के उम्मीदवार का समर्थन कीजिये। खड़गे जी ने कहा कि हम स्पीकर पद के उम्मीदवार का समर्थन करने के लिए तैयार है, लेकिन संसदीय परंपरा के अनुसार उपाध्यक्ष विपक्ष का होना चाहिये, कांग्रेस नेतृत्व वाली यूपीए के सरकार में भी ऐसा ही होता था। इसपर राजनाथ सिंह ने कहा कि दोबारा फ़ोन करेंगे, लेकिन अभी तक फ़ोन नहीं आया। इससे पता चलता है कि नियत साफ़ नहीं है।” राहुल गाँधी ने कहा कि पीएम मोदी संसद में कोई रचनात्मक सहयोग नहीं चाहते हैं।
स्पीकर के मुद्दे पर समाजवादी पार्टी (सपा) प्रमुख़ अखिलेश यादव ने कहा कि जल्द ही सब कुछ सामने आ जायेगा। विपक्ष के साथ-साथ सपा की भी माँग है कि लोकसभा में उपाध्यक्ष का पद विपक्ष के उम्मीदवार को मिलना चाहिये। डीएमके प्रमुख और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने भी यही शर्त रखी थी।
भाजपा राज में उपाध्यक्ष का पद
2014 से भाजपा की सरकार ने उस संसदीय परम्परा को तोड़ा हुआ है, जिसमें लोकसभा में उपाध्यक्ष का पद विपक्ष को दे दिया जाता था। कांग्रेस नेतृत्व वाली यूपीए की सरकार ने हमेशा से ही इस परंपरा का पालन किया है। भाजपा ने 2014 में सरकार बनने पर अपनी सहयोगी पार्टी अन्नाद्रमुक के एम थंबीदुरई को लोकसभा का उपाध्यक्ष नियुक्त किया था, जबकि 2019 से यह पद खाली रहा है। अब 2024 में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के लिए सत्ता पक्ष और विपक्ष में आम सहमति नहीं बन पायी।
इंडिया गठबंधन के पास संसद में 233 सांसद हैं, जबकि भाजपा नेतृत्व वाली एनडीए के पास 293 सांसद है, जिसमें से भाजपा के 240 सांसद है। अध्यक्ष पद पर जीत के लिए साधारण बहुमत की जरूरत होती है। यानी कुल डाले गये वैध मतों में से जिसे सबसे अधिक मत मिलते हैं, वही लोकसभा का स्पीकर चुना जायेगा।





