ED के सूत्रों के मुताबिक, छापे भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल के भिलाई (दुर्ग जिले) स्थित परिसरों, चैतन्य बघेल के कथित करीबी सहयोगी लक्ष्मी नारायण बंसल उर्फ पप्पू बंसल, और कुछ अन्य लोगों के ठिकानों पर भी मारे गए। ऐसा माना जा रहा है कि चैतन्य बघेल अपने पिता के साथ भिलाई में रहते हैं और उन्हें इस घोटाले से हुई आय का "प्राप्तकर्ता" माना जा रहा है। ED के अधिकारियों ने बताया कि लगभग 14-15 परिसरों पर छापे मारे गए हैं, और जांच जारी है।
ED ने पहले कहा था कि छत्तीसगढ़ शराब घोटाले के कारण राज्य को भारी राजस्व का नुकसान हुआ, और इस घोटाले से 2,100 करोड़ रुपये से अधिक की राशि शराब सिंडिकेट के लाभार्थियों की जेबों में चली गई। इस घोटाले में कई महत्वपूर्ण लोगों के शामिल होने का आरोप है।
इस मामले में ED ने जनवरी में कांग्रेस पार्टी के पूर्व मंत्री कवासी लखमा, रायपुर के महापौर और कांग्रेस नेता एजाज ढेबर के बड़े भाई अनवर ढेबर, पूर्व आईएएस अधिकारी अनिल टुटेजा, भारतीय दूरसंचार सेवा (ITS) के अधिकारी अरुणपति त्रिपाठी और कुछ अन्य लोगों को गिरफ्तार किया था। ED के अनुसार, यह घोटाला 2019 से 2022 तक हुआ था, जब छत्तीसगढ़ में भूपेश बघेल के नेतृत्व में कांग्रेस सरकार थी। इस पूरे मामले की जांच में ED ने अब तक विभिन्न आरोपियों की करीब 205 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की है।
कांग्रेस पार्टी और उसके नेता इस कार्रवाई को राजनीति से प्रेरित मान रहे हैं, और वे इसे एकतरफा राजनीतिक बदले की कार्रवाई के रूप में देख रहे हैं।
पार्टी के नेताओं का कहना है कि यह छापेमारी और जांच मुख्य रूप से कांग्रेस के खिलाफ किया जा रहा एक नकारात्मक अभियान है, जिसका उद्देश्य कांग्रेस की छवि को धूमिल करना है। वहीं, दूसरी ओर, ED का दावा है कि यह छापेमारी शराब घोटाले में शामिल लोगों की संपत्तियों को जब्त करने और उनके खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई करने के लिए की गई है।
यह मामला राज्य के राजनीतिक परिप्रेक्ष्य में महत्वपूर्ण हो गया है, क्योंकि इसमें छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और उनकी पार्टी के नेताओं के खिलाफ उठाए गए कदमों को लेकर राजनीतिक वातावरण गरमाया हुआ है। ED की कार्रवाई के बाद से छत्तीसगढ़ में कांग्रेस पार्टी के विरोध और समर्थन के स्वर लगातार बढ़ रहे हैं, और यह देखना होगा कि आने वाले दिनों में इस मामले की जांच के बाद क्या स्थिति बनती है।
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