फ़रेब की संभावनाओं के चलते आग्रह
मनोज झा ने कहा कि वह गड़बड़ियों की बात बिना आधार के नहीं कर रहे हैं, बल्कि साक्ष्य के आधार पर बोल रहे हैं। उन्होंने कहा कि पोस्टल बैलेट को लेकर अगर 2020 वाली संभावना दिखी या फिर आहट भी सुनाई दी, तो इसका परिणाम 2020 वाला नहीं होने वाला है। इस बार के परिणाम के पीछे बिहार की जनता खड़ी होगी। दरअसल, साल 2020 में बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान 73 हज़ार ऐसे मतदाताओं की पहचान की गयी थी जिन्होंने बैलेट पेपर से मतदान किया था। पहचान किये गये लोगों में 80 वर्ष से ज़्यादा उम्र के मतदाता शामिल थे। ख़बरों में इन बैलेट पेपर के साथ हुई छेड़छाड़ की खबरें सुर्ख़ियों में छायी हुई थी।
मनोज झा ने कहा, “पोस्टल बैलेट बड़ी संख्या में होते हैं, आप सभी जानते हैं कि पोस्टल बैलेट किसका होता है। ये उनका होता है जो बड़ी संख्या में बदलाव चाहते है।” उन्होंने कहा कि 2020 के बिहार विधानसभा चुनाव में शक्ति सिंह(आरजेडी पूर्व विधायक और प्रदेश प्रवक्ता) के साथ जो घालमेल किया गया था, उसके बारे में सब जानते हैं। इसलिए उन्होंने माँग की है कि पोस्टल बैलेट की गिनती पहले हो और उसका रिकॉर्ड दर्ज़ हो। साथ ही हर राउंड की मतगणना को सार्वजनिक किया जाये। जब तक एक का डाटा अपलोड न किया जाये, तब तक दूसरे राउंड की गिनती शुरू नहीं की जानी चाहिये।
एग्जिट पोल ख़र्च का तमाशा है
मनोज झा ने कहा कि 1 जून से वे ऐसे ख़र्च का तमाशा देख रहे है, जिसे एग्जिट पोल कहते है। बिहार में ये एग्जिट पोल सही साबित नहीं होते है।
पीएमओ(प्रधानमंत्री से जुड़े अधिकारी/मंत्री) तक एग्जिट पोल करने वालों की पैसों से मदद करता है। खर्च का यह उत्सव जिसने भी तय किया है, उसको मुबारक हो, क्योंकि यह सब बाजार से जुड़ा हुआ है। कुछ लोगों ने एग्जिट पोल के नाम पर करोडो रूपये कमाये है। 4 जून दोपहर 12 बजे तक आप प्रसन्न रहिये, ये आपका अधिकार है।
मनोज झा ने आरोप लगाया कि चुनाव के दौरान ज्यादातर बूथों पर फॉर्म 17-सी उपलब्ध नहीं कराया गया। हालांकि, पार्टी ने दिल्ली और पटना में इसकी शिक़ायत की है।





