दरअसल, ईवीएम मशीन में नोटा सहित अधिकतम 384 उम्मीदवार ही दर्ज हो सकते हैं। यदि उम्मीदवारों की संख्या 384 से अधिक होगी तो चुनावों को मतपत्रों के अलावा कराने का कोई विकल्प नहीं बचेगा।
मतपत्र से चुनाव करवाना है - दिग्विजय सिंह
दिग्विजय सिंह ने सुसनेर के कचनारिया गाँव में एक नुक्कड़ सभा को संबोधित करते हुए पूछा कि ‘चुनाव ईवीएम से हो या मतपत्र से हो?' इसपर लोगों ने चुनावों को मतपत्रों से कराने में सहमति व्यक्त की। दिग्विजय सिंह का कहना है कि ईवीएम के द्वारा निष्पक्ष चुनाव नहीं कराया जा सकता है।मतपत्र ही एकमात्र विकल्प है जिससे निष्पक्ष चुनाव सभव है।
ईवीएम से चुनावी निष्पक्षता का सवाल क्यों जुड़ा है?
विपक्ष ने कई बार सवाल उठाया है कि ईवीएम से चुनाव निष्पक्ष तरीके से नहीं कराया जा सकता। इसके लिए जरूरी है कि चुनावों को मतपत्रों के द्वारा करवाया जाये। इसके अलावा ईवीएम को लेकर कुछ मूलभूत सवाल भी जुड़े हुए है, जैसे -
- इसकी क्या गारंटी है कि ईवीएम के साथ कोई छेड़-छाड़ नहीं की जा सकती है?
- कई ऐसे देश हैं जहाँ चुनावों को ईवीएम के माध्यम से कराया जाता था, लेकिन निष्पक्षता पर उठे सवालों को देखते हुए अब ईवीएम के उपयोग को प्रतिबंधित कर दिया गया है। इन देशों में शामिल हैं- जर्मनी, जापान, यू.के, यूएस आदि।
- ईवीएम या मतपत्र में से चुनाव कराने का सरल और निष्पक्ष तरीका कौन सा है?
- ईवीएम के कारण चुनावों की निष्पक्षता पर हमेशा सवाल रहेगा।
दिग्विजय सिंह ने कहा है कि भारतीय जनता पार्टी की जीत का कोई जिम्मेदार है तो वो ईवीएम है। राजगढ़ में भाजपा की तरफ़ से मौजूदा सांसद रोडमल नागर को लोकसभा का उम्मीदवार घोषित किया गया है।





