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शिमला में मस्जिद निर्माण को अवैध बताते हुए हिंदू संगठनों ने प्रदर्शन किया, पुलिस ने किया लाठीचार्ज

वक्फ बोर्ड के वकील ने बताया कि कोर्ट ने स्वामित्व के बारे में पूछा और दस्तावेजी साक्ष्यों के माध्यम से हमने न्यायालय को बताया कि 1947 में जब पूरे भारत में वक्फ संपत्तियों का सर्वेक्षण किया गया था, तब मस्जिद वक्फ बोर्ड की संपत्ति थी। इससे जुड़े दस्तावेज हम

शिमला में मस्जिद निर्माण को अवैध बताते हुए  हिंदू संगठनों ने प्रदर्शन किया,  पुलिस ने किया लाठीचार्ज
फोटो: शिमला में मस्जिद निर्माण को अवैध बताते हुए हिंदू संगठनों ने प्रदर्शन किया, पुलिस ने किया लाठीचार्ज
हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में मस्जिद के  निर्माण के मामले में बुधवार को हिंदू संगठन ने प्रदर्शन किया। हिंदू संगठन इसे अवैध निर्माण बताकर रोकने की माँग कर रहे हैं। शिमला के संजोली में बड़ी सख्यां में जमा हुए हिंदू संगठन के लोगों ने पुलिस बेरिकेडिंग तोड़ दी। जिसके बाद लोगों ने मस्जिद की और बढ़ने की कोशिश की। लेकिन मौके पर तैनात पुलिस ने उन्हें रोकने की कोशिश की। जब कोशिश नाकाम हो गई तो पुलिस ने लोगों को खदेड़ने के लिए वॉटर कैनन के इस्तेमाल के साथ लाठीचार्ज भी किया। इसके अलावा पुलिस ने शिमला में धारा 163 भी लागू कर रखी है।

इससे पहले 5 सितंबर को भी विभिन्न संगठनों के साथ स्थानीय लोगों ने प्रदर्शन किया था। उनकी मांग थी कि मस्जिद के  कथित अवैध निर्माण को गिराया जाए। इसके लिए प्रदर्शनकारियों ने 2 दिन का अल्टीमेटम दिया था की इसके खिलाफ एक्शन लिया जाए।


क्या है पूरा विवाद


दरअसल, संजोली इलाके में एक मस्जिद का निर्माण 1947 में हुआ था। तब वह कच्ची थी। जिसके बाद 2010 में मस्जिद का निर्माण दोबारा शुरू हुआ। जिसको लेकर 2010 में ही मस्जिद के अवैध निर्माण को लेकर नगर निगम के पास शिकायत पहुंची और तब से अभी तक कमिश्नर कोर्ट में केस चल रहा है। इसके बावजूद 2024 में मस्जिद का निर्माण पांच मंजिल तक हो गया। नगर निगम ने करीब 35 बार निर्माण रोकने से जुड़ा नोटिस भेजा।

लेकिन मामले ने 31 अगस्त को तूल पकड़ा। लोगों का आरोप है 31 अगस्त की शाम मस्जिद के पास कुछ समुदाय विशेष के लोगों ने एक स्थानीय नागरिक के साथ मारपीट की। इस घटना के बाद ही मामले ने तूल पकड़ा और हिंदू संगठनों समेत कई स्थानीय लोगों ने मंस्जिद के अवैध निर्माण को तोड़ने की मांग की। वहीं कुछ लोगों का आरोप यह भी है कि इलाके में बनी मस्जिद को बिना अनुमति और बिना नक्शा पास किए बनाया गया है।


शांतिपूर्वक प्रदर्शन पर कोई रोक नहीं


मामले पर हिमाचल के मुख्यमंत्री सुखविंदर सुक्खू ने कहा, “प्रशासन हर चीज को देख रहा है। शांतिपूर्ण प्रदर्शन पर कोई रोक नहीं। हम सभी समुदाय का सम्मान करते हैं। कानून को हाथ में लेने की किसी को भी इजाजत नहीं दी जाएगी। राजनीतिक रंग देना ठीक नहीं है। इस मामले में कानून के हिसाब से कार्रवाई होगी। वहीं राज्य सरकार में मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि सभी को शांतिपूर्वक तरीके से प्रदर्शन करने का अधिकार है। लेकिन कोई ऐसी स्थिति नहीं होनी चाहिए की राज्य की शांति भंग हो जाए। राज्य की कानूनी व्यवस्था को ख़राब नहीं किया जा सकता। अगर वो जगह अवैध पाई गई तो कार्रवाई होगी और कानून के हिसाब से उसे ढहाया जाएगा।


कोर्ट की सुनवाई में क्या हुआ था


मामले को लेकर 7 सितंबर को कमिश्नर कोर्ट में सुनवाई भी हुई थी। इस सुनवाई के दौरान मस्जिद की ढाई मंजिला हिस्सा किसने बनाया। इसका जबाब न तो वक्फ बोर्ड दे पाया और नहीं इसके लिए बनाई गई कमेटी। सुनवाई के बाद वक्फ बोर्ड के वकील ने बताया कि कोर्ट ने स्वामित्व के बारे में पूछा और दस्तावेजी साक्ष्यों के माध्यम से हमने न्यायालय को बताया कि 1947 में जब पूरे भारत में वक्फ संपत्तियों का सर्वेक्षण किया गया था, तब मस्जिद वक्फ बोर्ड की संपत्ति थी। इससे जुड़े दस्तावेज हम अगली सुनवाई यानी पांच अक्टूबर को पेश करेंगे। वहीं अवैध निर्माण से जुड़ा मामला कोर्ट में लंबित है।