लेकिन आम आदमी पार्टी (आप) ने इस बिल पर गंभीर आपत्ति जताई है और बीजेपी सरकार पर निजी स्कूलों के साथ सांठगांठ का आरोप लगाया है। पूर्व स्वास्थ्य मंत्री सौरभ भारद्वाज ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि यह कानून बिना अभिभावकों और आम जनता की राय लिए लाया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी की एक्शन कमेटी के चेयरमैन भारत अरोड़ा खुद पार्टी कार्यकारिणी के सदस्य हैं, जिससे समिति की निष्पक्षता पर सवाल उठता है।
भारद्वाज ने दावा किया कि इस वर्ष कई निजी स्कूलों ने 40% से 82% तक फीस बढ़ाई है, जिसे सरकार की मौन स्वीकृति प्राप्त है।
उन्होंने यह भी कहा कि प्रस्तावित ड्रॉ प्रणाली, जो PTA (Parents Teacher Association) की पारंपरिक चुनाव प्रक्रिया को दरकिनार करती है, अभिभावकों की भागीदारी को कमजोर करती है। भारद्वाज ने 8 अप्रैल, 2025 के दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए कहा कि शिक्षा निदेशालय (DOE) के पास अधिकार है कि वह निजी स्कूलों का ऑडिट कराकर अतिरिक्त वसूली गई फीस अभिभावकों को लौटवा सकता है।
आप नेता ने दिल्ली के शिक्षा मंत्री आशीष सूद पर भी भ्रामक बयान देने का आरोप लगाया और कहा कि सरकार निजी स्कूलों के हित में काम कर रही है, न कि छात्रों और उनके अभिभावकों के हित में। इस बीच, दिल्ली में स्कूली बच्चों के लिए बंद पड़ी दिल्ली परिवहन निगम (DTC) की बस सेवा को फिर से शुरू करने की घोषणा की गई है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता को इस संबंध में भेजी गई अभिभावकों की अपील पर कार्रवाई करते हुए डीटीसी विभाग ने पुष्टि की है कि 2022 से बंद पड़ी इस सेवा को दोबारा बहाल किया जाएगा।





