छात्रों की याचिका पर हाईकोर्ट का फैसला
यह आदेश जामिया के चार छात्रों द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई के बाद आया, जिसमें उन्होंने विश्वविद्यालय प्रॉक्टर के निलंबन आदेश और कैंपस में उनके प्रवेश पर प्रतिबंध को चुनौती दी थी। छात्रों के वकील ने अदालत के समक्ष तर्क दिया कि वे शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन कर रहे थे और उनके खिलाफ की गई कार्रवाई अनुचित थी।
वहीं, विश्वविद्यालय प्रशासन का प्रतिनिधित्व कर रहे अधिवक्ता अमित साहनी और किस्ले मिश्रा ने अदालत में दलील दी कि छात्रों ने विरोध प्रदर्शन के लिए प्रशासन से कोई पूर्व अनुमति नहीं ली थी। इसके अलावा, प्रशासन ने यह भी दावा किया कि प्रदर्शनकारियों ने परिसर की संपत्ति को नुकसान पहुंचाया और अनुशासनहीनता की। वकीलों ने यह भी बताया कि छात्र कैंटीन के बाहर सो रहे थे, जिसकी इजाजत नहीं थी।
हिरासत और विरोध का विस्तार
इससे पहले, फरवरी में जामिया परिसर में विरोध प्रदर्शन कर रहे कुछ छात्रों को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में ले लिया था। प्रदर्शनकारियों का दावा था कि हिरासत के बाद कुछ छात्र घंटों तक लापता रहे, जिससे विरोध और तेज हो गया। हालांकि, लगभग 12 घंटे बाद सभी छात्रों को रिहा कर दिया गया।
हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद छात्रों और विश्वविद्यालय प्रशासन के बीच विवाद को हल करने की उम्मीद जताई जा रही है।
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