लोकतांत्रिक मूल्यों का उल्लंघन: आतिशी
विधानसभा परिसर में प्रवेश से रोके जाने पर नाराजगी व्यक्त करते हुए आतिशी ने इसे लोकतंत्र की हत्या करार दिया। उन्होंने कहा, "विधानसभा परिसर के बाहर विधायकों को रोकना लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। यह एक अभूतपूर्व और अलोकतांत्रिक कदम है, जो हमारे संविधान के मूल सिद्धांतों पर चोट पहुंचाता है।"
उन्होंने आगे कहा कि "बाबासाहेब भीमराव आंबेडकर और अमर शहीद भगत सिंह की तस्वीरों को दिल्ली सरकार के दफ्तरों से हटाना शहीदों और दलित-पिछड़े समाज के योगदान का अपमान है। यह न केवल ऐतिहासिक विरासत का अपमान है, बल्कि सरकार की मंशा पर भी सवाल खड़े करता है।"
विरोध प्रदर्शन और विधानसभा परिसर में एंट्री से रोकने का आरोप
विधानसभा में विपक्षी विधायकों के निलंबन के खिलाफ आप विधायकों ने विधानसभा परिसर के बाहर धरना प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि आप के विधायकों को विधानसभा के अंदर प्रवेश करने नहीं दिया जा रहा है, जिससे वे सदन में अपनी आवाज उठाने से वंचित हो रहे हैं।
आतिशी ने इस पूरे घटनाक्रम को लेकर कड़ी नाराजगी जताई और इसे अलोकतांत्रिक करार दिया। उन्होंने कहा, "आज तक देश के इतिहास में ऐसा कभी नहीं हुआ है कि किसी चुने हुए विधायक को विधानसभा परिसर में घुसने से रोका जाए। संसद में भी जब सदस्यों को निलंबित किया जाता है, तब भी उन्हें गांधी प्रतिमा के नीचे विरोध प्रदर्शन करने की अनुमति होती है। आखिर हमें किस आधार पर रोका जा रहा है?"
आतिशी ने कहा कि जब उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष से बात करने की कोशिश की, तो उनकी कोई सुनवाई नहीं हुई। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि दिल्ली पुलिस अधिकारियों ने उन्हें बताया कि चूंकि वे निलंबित हैं, इसलिए उन्हें विधानसभा परिसर में भी प्रवेश नहीं करने दिया जाएगा।
उन्होंने कहा, "यह पूरी तरह से असंवैधानिक और तानाशाही भरा रवैया है। लोकतंत्र में चुने हुए जनप्रतिनिधियों को सदन में जाने और जनता की आवाज उठाने से रोकना अभूतपूर्व है।"
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