अदालत ने स्पष्ट किया कि ट्रंप ने International Emergency Economic Powers Act (IEEPA) का दुरुपयोग कर अपने संवैधानिक अधिकारों की सीमाओं का उल्लंघन किया।
ट्रंप ने अपने कार्यकाल के दौरान कई देशों पर मनमाने टैरिफ लगाए थे, जिनका वैश्विक व्यापार और विशेषकर एशियाई शेयर बाजारों पर व्यापक असर हुआ था। चीन और अमेरिका के बीच ट्रेड वॉर इन्हीं फैसलों की वजह से भड़का था, जो लंबे समय तक दोनों देशों के बीच तनाव का कारण बना रहा।
न्यायाधीशों के एक पैनल ने फैसले में कहा कि व्हाइट हाउस ने इन टैरिफ आदेशों के ज़रिए कानून की स्पष्ट अवहेलना की है। अदालत ने यह भी कहा कि ट्रंप द्वारा लगाए गए टैरिफ किसी भी वैध अधिकार के दायरे से बाहर थे। अदालत के इस फैसले के बाद ट्रंप की एक अहम आर्थिक नीति पर सीधे तौर पर रोक लग गई है। डोनाल्ड ट्रंप ने इन टैरिफ नीतियों को अमेरिका में घरेलू निर्माण को बढ़ावा देने और विदेशी निर्भरता कम करने के उद्देश्य से प्रस्तुत किया था।
हालांकि, आलोचकों का कहना रहा है कि यह कदम आर्थिक राष्ट्रवाद की आड़ में वैश्विक व्यापार को नुकसान पहुंचाने वाला था। यह फैसला न केवल ट्रंप की आर्थिक नीतियों के लिए एक बड़ा झटका है, बल्कि भविष्य में किसी भी राष्ट्रपति द्वारा IEEPA के इस्तेमाल की सीमा को भी स्पष्ट करता है।





