विपक्ष का आरोप है कि सरकार इस कानून के जरिए वक्फ संपत्तियों पर नियंत्रण स्थापित करना चाहती है। वहीं, सरकार का दावा है कि यह बिल वक्फ संपत्तियों के बेहतर प्रबंधन और मुस्लिम वंचित महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए लाया गया है। बीजेपी सांसद जगदंबिका पाल की अध्यक्षता में समिति ने 27 जनवरी को विधेयक पर विचार किया और बीजेपी व उसके सहयोगी दलों द्वारा प्रस्तावित 14 संशोधनों को मंजूरी दी, जबकि विपक्ष द्वारा प्रस्तावित 44 संशोधनों को खारिज कर दिया गया।
मुस्लिम संगठनों का विरोध और आंदोलन की रणनीति
विपक्ष के साथ मुस्लिम संगठनों ने भी इस विधेयक का विरोध किया है। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के नेतृत्व में कई मुस्लिम संगठनों ने पहले भी इसके खिलाफ प्रदर्शन किया था और अब इसे राज्य स्तर पर ले जाने की योजना बना रहे हैं।
17 मार्च को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की घोषणा की गई है, जबकि बिहार, आंध्र प्रदेश और देश के अन्य हिस्सों में भी विरोध प्रदर्शन किए जाएंगे। समिति के अध्यक्ष जगदंबिका पाल ने कहा, "अगर किसी को वक्फ बिल से आपत्ति है, तो वे सुप्रीम कोर्ट जा सकते हैं। लेकिन वे एक ओर कोर्ट जाने की बात कर रहे हैं, तो दूसरी ओर धमकियां भी दे रहे हैं। लोकतंत्र धमकियों से नहीं, बल्कि विधायी प्रक्रिया से चलता है। कानून जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधियों के माध्यम से बनेगा, न कि दबाव में।"
मुस्लिम संगठनों का पक्ष: "विधेयक असंवैधानिक"
मुस्लिम संगठनों का आरोप है कि यह विधेयक मुसलमानों को निशाना बनाने का प्रयास है और सरकार उन्हें सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर कर रही है। जमात-ए-इस्लामी हिंद के उपाध्यक्ष, इंजीनियर मुहम्मद सलीम ने कहा, "वक्फ संपत्तियां सरकारी संपत्ति नहीं, बल्कि धार्मिक ट्रस्ट हैं। यह विधेयक वक्फ की स्वायत्तता पर सीधा हमला है। यह मुस्लिम संपत्तियों और संस्थाओं को व्यवस्थित रूप से कमजोर करने के लिए लाया गया है।" उन्होंने यह भी कहा कि यदि सरकार समझदारी से काम लेती है, तो इसे वापस लेगी। अन्यथा, मुस्लिम संगठन संवैधानिक, कानूनी और शांतिपूर्ण तरीकों से इसका विरोध करेंगे।
वक्फ इस्लामी परंपरा में एक धार्मिक और धर्मार्थ दान है, जो मुस्लिम समुदाय के लाभ के लिए समर्पित किया जाता है। ऐसी संपत्तियों को बेचा नहीं जा सकता, न ही उनका कोई अन्य उपयोग हो सकता है। भारत में वक्फ संपत्तियों का उपयोग मस्जिदों, मदरसों, कब्रिस्तानों और यतीमखानों के लिए किया जाता है। हालांकि, इनमें से कई संपत्तियां खाली पड़ी हैं या उन पर अतिक्रमण हो चुका है।
वर्तमान में, वक्फ संपत्तियों का प्रबंधन वक्फ अधिनियम, 1995 के तहत राज्य स्तरीय वक्फ बोर्डों द्वारा किया जाता है। इन बोर्डों में राज्य सरकार द्वारा नामित सदस्य, मुस्लिम विधायक, राज्य बार काउंसिल के सदस्य, इस्लामी विद्वान और वक्फ संपत्तियों के प्रशासक शामिल होते हैं। केंद्र सरकार के अनुसार, भारत में 8,72,351 वक्फ संपत्तियां हैं, जो 9,40,000 एकड़ से अधिक भूमि पर फैली हुई हैं, जिनकी अनुमानित कीमत 1.2 लाख करोड़ रुपये है। वक्फ बोर्ड भारतीय रेलवे और सशस्त्र बलों के बाद देश का तीसरा सबसे बड़ा भूस्वामी है।





