गौर करने वाली बात यह है कि खेल मंत्री का बयान बुधवार को संसद में तब आया, जब विनेश के डिसक्वालिफाई होने की ख़बर आयी। मांडविया ने कहा कि विनेश के मामले में विपक्ष राजनीति कर रहा है, जो ठीक नहीं है। इधर, विपक्ष का कहना था कि पेरिस ओलंपिक में 50 किलोग्राम के कुश्ती के मुक़ाबले में विनेश को सिर्फ़ इसलिए फाइनल नहीं खेलने दिया गया, क्योंकि उनका वज़न 50 किलोग्राम से 100 ग्राम अधिक था। सरकार उन कारणों की जाँच करवाये, जिसकी वज़ह से कुश्ती में गोल्ड मेडल लाने का एक बेहतर अवसर देश के हाथों से निकल गया।
विनेश को लेकर विपक्ष की माँग
कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा था कि विनेश के साथ जो हुआ वो बहुत दुख की बात है। सरकार को विनेश के डिसक्वालिफाई किये जाने के ख़िलाफ अपील करनी चाहिए, और देश के चैंपियन विनेश फोगाट को न्याय दिलाने के लिए हर संभव कोशिश करनी चाहिए। बुधवार को खड़गे ने संसद में विनेश के मुद्दे को लेकर कुछ बोलने की अनुमति मांगी थी, लेकिन सभापति धनखड़ ने इसकी अनुमति नहीं दी। खड़गे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर कहा कि विनेश का सफ़र चुनौतियों से भरा हुआ रहा है, ऐसे में विनेश के साथ पेरिस ओलंपिक में जो हुआ, वह विनेश के साथ अन्याय है।
समाजवादी पार्टी प्रमुख और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने ‘एक्स’ पर लिखा कि विनेश के साथ जो हुआ, उसके कारणों की गहराई से जाँच-पड़ताल हो और सुनिश्चित किया जाये कि सच्चाई क्या है, और इसके पीछे की असली वज़ह क्या है? सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म पर कई लोग यह भी सवाल उठा रहे है कि विनेश के साथ ऐसा कैसे हो सकता है। विनेश के साथ गये डॉक्टर और अन्य मेडिकल स्टाफ क्या कर रहा था? किसान नेता राकेश टिकैत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर विनेश को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी, उन्होंने लिखा, “यह एक बेहद दुखद ख़बर है कि देश की बेटी को कोई अखाड़े के मैदान में नहीं हरा पाया, लेकिन साजिश के अखाड़े में हरा दिया गया है। देश का एक मेडल आज राजनीति का शिकार हो गया, यह देश इस दिन को कभी नहीं भूल सकता है।” हालाँकि विनेश ने कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन फॉर स्पोर्ट में अपील दायर की है कि उन्हें उनके प्रदर्शन के लिए सिल्वर मेडल दिया जाये। इसपर शुक्रवार को कोर्ट का फ़ैसला आने की संभावना है।





