भोपाल में कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी के नेतृत्व में ईडी के ऑफिस के बाहर प्रदर्शन किया। वहीं बिहार में भी प्रदेश अध्यक्ष अखिलेश प्रसाद के नेतृत्व में प्रदर्शन हुआ। इसके अलावा जयपुर ,गुवाहाटी समेत देश के अन्य राज्यों में सेबी प्रमुख के इस्तीफे और अडानी मामले में जेपीसी जांच की मांग को लेकर प्रदर्शन हुए।
10 अगस्त को जारी हिंडनबर्ग की रिपोर्ट के बाद लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने तीन सवाल पूछे थे। पहला, माधवी बुच ने अब तक इस्तीफा क्यों नहीं दिया? दूसरा, अगर निवेशकों ने अपनी गाढ़ी कमाई का पैसा खोया तो ये किसकी जिम्मेदारी बनती है- पीएम नरेंद्र मोदी, सेबी चेयरपर्सन या फिर गौतम अडानी? तीसरा, जब सेबी चेयरपर्सन पर गंभीर आरोप लगे हों, तब क्या सुप्रीम कोर्ट मामले पर एक बार फिर स्वतः संज्ञान लेगा?
हिंडेनबर्ग की नयी रिपोर्ट में दावा
10 अगस्त को जारी रिपोर्ट में हिंडेनबर्ग ने अडानी ग्रुप और सेबी चीफ के लिंक होने का दावा किया था। हिंडनबर्ग की रिपोर्ट में कहा गया है था कि 'हमें अडानी समूह पर सबूत पेश किए लगभग 18 महीने हो गए हैं। हमारी रिपोर्ट में ऑफशोर में मुख्य रूप से मॉरीशस-आधारित शेल कंपनियों के एक बड़े नेक्सेस का खुलासा किया गया। इन कंपनियों का उपयोग संदिग्ध अरबों डॉलर के अघोषित संबंधित पार्टी ट्रांजैक्शन, अघोषित निवेश और स्टॉक हेरफेर के लिए किया जाता था।'
हिंडनबर्ग रिपोर्ट में आगे लिखा गया है था कि 'हमारी रिपोर्ट की पुष्टि और विस्तार करने वाले 40 से अधिक स्वतंत्र मीडिया जांचों के साथ-साथ सबूतों के बावजूद सेबी ने अडानी समूह के खिलाफ कोई सार्वजनिक कार्रवाई नहीं की। इसके बजाय 27 जून, 2024 को सेबी ने हमें ही एक कारण बताओ नोटिस भेजा। सेबी ने हमारे 106 पेज के विश्लेषण में किसी भी तथ्यात्मक त्रुटि का आरोप नहीं लगाया। बल्कि यह कहा कि जो भी सबूत दिए गए वो अपर्याप्त थे।'





