इसी दौरान लखनऊ से आए कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिनेश सिंह भी उनसे मिलने के लिए उनके आवास पर पहुंचे और उनकी रिहाई पर प्रसन्नता व्यक्त की।
सांसद ने समर्थकों और मीडियाकर्मियों से बातचीत के दौरान भावुक होते हुए कहा कि जो लड़ाई वह लंबे समय से लड़ रहे थे, वह कुछ प्रभावशाली लोगों की आंखों में बहुत बुरी तरह खटक रही थी। उन्होंने बताया कि 11 जनवरी को आयोजित उनकी प्रेस कॉन्फ्रेंस भ्रष्टाचारियों और भू-माफियाओं के खिलाफ एक निर्णायक और मजबूत लड़ाई की शुरुआत थी। इस प्रेस कॉन्फ्रेंस ने स्थानीय भू-माफियाओं को इस कदर परेशान कर दिया कि वे बौखला गए और उनके खिलाफ एक सुनियोजित षड्यंत्र रच डाला। राठौर ने दृढ़ विश्वास के साथ कहा कि उन्हें ईश्वर और देश के कानून की अदालत पर पूरा भरोसा है। उनका मानना है कि उन्हें जल्द ही न्याय मिलेगा और वह पूरी तरह से दोषमुक्त होकर बाहर आएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि अदालत में इस मामले की परतें एक-एक करके खुलेंगी और सच सबके सामने आ जाएगा।
उन्होंने जोर देकर कहा कि भू-माफियाओं के खिलाफ उनकी लड़ाई और गरीबों के हक के लिए उनका संघर्ष किसी भी हाल में रुकने वाला नहीं है। जनता को संबोधित करते हुए उन्होंने ऐलान किया कि अब वह फिर से अपनी पुरानी दिनचर्या शुरू करेंगे और रोजाना सुबह नौ बजे अपने कार्यालय में बैठकर आम लोगों की समस्याओं को सुनेंगे और उनके समाधान के लिए प्रयास करेंगे।
क्या है पूरा मामला?
इस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत 17 जनवरी 2025 को तब हुई, जब एक महिला ने कांग्रेस सांसद राकेश राठौर पर शादी का झूठा वादा करके दुष्कर्म करने का बेहद संगीन आरोप लगाया। इस आरोप के बाद 23 जनवरी को जिले की विशेष एमपी-एमएलए कोर्ट में उनकी जमानत याचिका पर सुनवाई हुई, लेकिन कोर्ट ने उनकी जमानत को अस्वीकार कर दिया। इसके बाद 30 जनवरी को शहर कोतवाली पुलिस ने उन्हें उनके लोहारबाग स्थित निजी आवास से हिरासत में लिया और गिरफ्तार कर लिया। फिर 11 मार्च को इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ खंडपीठ ने दुष्कर्म के मामले में उनकी जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए उन्हें जमानत दे दी।
इसी बीच पुलिस ने जांच के दौरान कोर्ट को सूचित किया कि मामले में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 69 को भी जोड़ा गया है। इसके जवाब में सांसद के वकीलों ने जिले के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) कोर्ट में एक नई जमानत अर्जी दाखिल की। 18 मार्च को इस अर्जी पर सुनवाई हुई और कोर्ट ने बीएनएस की धारा 69 के तहत भी सांसद को जमानत दे दी, जिसके बाद उनकी रिहाई का रास्ता साफ हो गया।
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