मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि समाजवादी पार्टी (सपा) के नेताओं का दोहरा चरित्र सामने आ रहा है। वह अपने बच्चों को इंग्लिश मीडियम स्कूलों में भेजते हैं, जबकि दूसरों के बच्चों को गांव के स्कूलों में पढ़ने की सलाह देते हैं। उन्होंने आगे कहा, “ये लोग अपने बच्चों को अंग्रेजी माध्यम में पढ़ाने के लिए भेजेंगे, जबकि गांवों के बच्चों को उर्दू पढ़ने की सलाह देते हैं। यही नहीं, इनका मकसद इन्हें कठमुल्ला और मौलवी बनाना होता है, यह बिल्कुल ठीक नहीं है। ऐसे उदाहरण हमें दिखाते हैं कि किस तरह से समाजवादी नेताओं का असली चरित्र सामने आता है।”
इसके बाद, मुख्यमंत्री ने भाषा के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि उनकी सरकार में हिंदी की उपभाषाओं को मान्यता दी जा रही है, और यह भी एक प्रकार का सम्मान है। "हमें गर्व है कि हमारी सरकार ने ब्रज, भोजपुरी, अवधी, और बुंदेलखंडी जैसी भाषाओं के लिए अकादमियों का गठन किया है। यह सारी भाषाएं हिंदी की उपभाषाएं हैं, यानी ये हिंदी की 'बेटियां' हैं। हमारी सरकार का उद्देश्य यह है कि इस सदन में सभी वर्गों, जातियों और समुदायों की आवाज को सुना जाए, और अगर किसी सदस्य को हिंदी में बात करने में कठिनाई हो, तो वह अपनी मातृभाषा जैसे अवधी, भोजपुरी या बुंदेलखंडी में बात कर सकते हैं।"
विपक्ष की आलोचना करते हुए सीएम योगी ने कहा कि, "आप लोग हमेशा हर अच्छे कदम का विरोध करते हैं, लेकिन हम इस कदम की सराहना करते हैं। जब दुनिया भर में भारतीय प्रवासी, जैसे मॉरीशस और फिजी में रहने वाले लोग, अवधी बोलने वाले हैं, तो इसे एक सम्मानित स्थान मिलना चाहिए। यह सब हमारी सरकार की नीति का हिस्सा है।" मुख्यमंत्री ने इस मुद्दे को और आगे बढ़ाते हुए कहा कि सदन में भारतीय भाषाओं के समावेश से न केवल भारत की सांस्कृतिक धरोहर को सम्मान मिलेगा, बल्कि यह उन लोगों के लिए भी सशक्तिकरण का एक जरिया बनेगा जिनकी मातृभाषाएं हिंदी की उपभाषाएं हैं। "हमारा उद्देश्य है कि हिंदी और इसकी विभिन्न बोलियों को मान्यता मिले, ताकि हर व्यक्ति, चाहे वह किसी भी वर्ग का हो, अपनी बात प्रभावी रूप से रख सके।"
Read This Also:- "महाकुंभ या मृत्यु कुंभ?"—ममता बनर्जी का योगी सरकार पर हमला, VIP संस्कृति पर उठाए सवाल
Read This Also:- "महाकुंभ या मृत्यु कुंभ?"—ममता बनर्जी का योगी सरकार पर हमला, VIP संस्कृति पर उठाए सवाल





