दूसरे चरण में घरों में रहने वाले व्यक्तियों की जनसंख्या, उनकी उम्र, रोजगार और सामाजिक-आर्थिक व सांस्कृतिक पृष्ठभूमि से जुड़ी जानकारी ली जाएगी। यह प्रक्रिया भारत के इतिहास में पहली बार डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग करके आयोजित की जाएगी, जहां नागरिकों को आत्म-सूचना (सेल्फ एन्यूमरेशन) का अवसर मिलेगा। जनगणना अधिकारी मोबाइल एप्लिकेशन का उपयोग करेंगे और डेटा संग्रहण व सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अत्याधुनिक तकनीक अपनाई जाएगी।
इस बार जनगणना में पूछे जाने वाले सवालों की संख्या में वृद्धि होगी। पहले 2011 में 29 सवाल पूछे गए थे, जबकि इस बार जाति संबंधी विवरण जोड़ने के साथ 30 सवाल पूछे जाएंगे। संभावित सवालों में शैक्षणिक योग्यता, परिवार के मुखिया की जाति और लिंग, विवाहित जोड़ों की संख्या, परिवार के पास मौजूद टेलीफोन, इंटरनेट, मोबाइल फोन, स्मार्टफोन, वाहन, और अन्य आधुनिक उपकरणों का विवरण, मुख्य अनाज, ईंधन, बिजली, शौचालय, स्नानघर, रसोई, और गैस कनेक्शन की उपलब्धता शामिल हैं।
इसके अलावा, घर के निर्माण में उपयोग की गई सामग्री जैसे दीवार, छत और फर्श के विवरण भी शामिल होंगे।
सरकार ने इस विशाल कार्य के लिए 34 लाख कर्मचारियों और पर्यवेक्षकों के साथ 1.3 लाख जनगणना कार्यकर्ताओं को नियुक्त करने का निर्णय लिया है। इस प्रक्रिया पर अनुमानित खर्च 12,000 करोड़ रुपये से अधिक होगा। गृह मंत्रालय ने बताया कि जनगणना की तैयारी और संचालन के लिए एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया गया है। गृह सचिव के नेतृत्व में यह समिति तीन महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह जनगणना देश के सामाजिक-आर्थिक ताने-बाने को बेहतर ढंग से समझने और नीति निर्माण के लिए एक मजबूत आधार प्रदान करेगी।





