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Census 2027: 12,000 करोड़ की लागत से दो चरणों में होगी देश की पहली डिजिटल जनगणना

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने घोषणा की है कि जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश जैसे बर्फबारी से प्रभावित राज्यों में यह प्रक्रिया 1 अक्टूबर 2026 |

Census 2027: 12,000 करोड़ की लागत से दो चरणों में होगी देश की पहली डिजिटल जनगणना
फोटो: Census 2027: 12,000 करोड़ की लागत से दो चरणों में होगी देश की पहली डिजिटल जनगणना
भारत सरकार ने देश में आगामी जनगणना के लिए अधिसूचना जारी की है, जिससे इस महत्वाकांक्षी प्रक्रिया की शुरुआत की तैयारी शुरू हो गई है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने घोषणा की है कि जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश जैसे बर्फबारी से प्रभावित राज्यों में यह प्रक्रिया 1 अक्टूबर 2026 से शुरू की जाएगी, जबकि बाकी देश में जनगणना 1 मार्च 2027 से आरंभ होगी। इस बार जनगणना में एक नई पहल के तहत जाति की गणना को भी शामिल किया जाएगा, जो स्वतंत्र भारत में पहली बार हो रहा है। यह जनगणना भारत की 16वीं और आजादी के बाद की 8वीं जनगणना होगी। जनगणना दो चरणों में संपन्न होगी। पहले चरण में देशभर के सभी घरों की आवासीय स्थिति, संपत्ति और बुनियादी सुविधाओं का विस्तृत विवरण एकत्रित किया जाएगा। 

दूसरे चरण में घरों में रहने वाले व्यक्तियों की जनसंख्या, उनकी उम्र, रोजगार और सामाजिक-आर्थिक व सांस्कृतिक पृष्ठभूमि से जुड़ी जानकारी ली जाएगी। यह प्रक्रिया भारत के इतिहास में पहली बार डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग करके आयोजित की जाएगी, जहां नागरिकों को आत्म-सूचना (सेल्फ एन्यूमरेशन) का अवसर मिलेगा। जनगणना अधिकारी मोबाइल एप्लिकेशन का उपयोग करेंगे और डेटा संग्रहण व सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अत्याधुनिक तकनीक अपनाई जाएगी। इस बार जनगणना में पूछे जाने वाले सवालों की संख्या में वृद्धि होगी। पहले 2011 में 29 सवाल पूछे गए थे, जबकि इस बार जाति संबंधी विवरण जोड़ने के साथ 30 सवाल पूछे जाएंगे। संभावित सवालों में शैक्षणिक योग्यता, परिवार के मुखिया की जाति और लिंग, विवाहित जोड़ों की संख्या, परिवार के पास मौजूद टेलीफोन, इंटरनेट, मोबाइल फोन, स्मार्टफोन, वाहन, और अन्य आधुनिक उपकरणों का विवरण, मुख्य अनाज, ईंधन, बिजली, शौचालय, स्नानघर, रसोई, और गैस कनेक्शन की उपलब्धता शामिल हैं। 

इसके अलावा, घर के निर्माण में उपयोग की गई सामग्री जैसे दीवार, छत और फर्श के विवरण भी शामिल होंगे। सरकार ने इस विशाल कार्य के लिए 34 लाख कर्मचारियों और पर्यवेक्षकों के साथ 1.3 लाख जनगणना कार्यकर्ताओं को नियुक्त करने का निर्णय लिया है। इस प्रक्रिया पर अनुमानित खर्च 12,000 करोड़ रुपये से अधिक होगा। गृह मंत्रालय ने बताया कि जनगणना की तैयारी और संचालन के लिए एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया गया है। गृह सचिव के नेतृत्व में यह समिति तीन महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह जनगणना देश के सामाजिक-आर्थिक ताने-बाने को बेहतर ढंग से समझने और नीति निर्माण के लिए एक मजबूत आधार प्रदान करेगी।