याचिकाकर्ताओं की दलीलें और कोर्ट की प्रतिक्रिया
याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अंजना प्रकाश और कोलिन गोंजाल्विस ने बहस की। उन्होंने दावा किया कि परीक्षा से पहले व्हाट्सएप संदेशों और वीडियो क्लिप्स के माध्यम से प्रश्नपत्र लीक हुए। कुछ वीडियो में कथित तौर पर लाउडस्पीकर पर उत्तर पढ़े जाते हुए दिखाया गया। कोर्ट ने इन डिजिटल साक्ष्यों की प्रमाणिकता पर सवाल उठाते हुए पूछा कि क्या इन्हें कानूनी रूप से स्वीकार किया जा सकता है।
कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि प्रश्नपत्र परीक्षा हॉल में प्रवेश के बाद लीक हुआ, जैसा कि आरोपों से प्रतीत होता है, तो उससे पूरी परीक्षा को रद्द करने का औचित्य नहीं बनता।
जब याचिकाकर्ता गोंजाल्विस ने कहा कि कई प्रश्न कोचिंग संस्थानों के मॉक पेपर्स से मेल खाते हैं, तब न्यायमूर्ति मनमोहन ने टिप्पणी की कि यह आम बात है और इससे कोई विशेष संदेह नहीं उठता। उन्होंने मज़ाकिया लहजे में कहा कि "जब हम कैंपस लॉ सेंटर में पढ़ते थे, तब डग्गी की किताबों से 90% प्रश्न आते थे।" सुनवाई के दौरान कोर्ट ने व्यापक चिंता जताई कि आजकल हर प्रतियोगी परीक्षा पर संदेह किया जा रहा है। न्यायमूर्ति मनमोहन ने कहा, "यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि अब कोई भी परीक्षा निष्कर्ष तक नहीं पहुंच रही। हर कोई दूसरों की असुरक्षा का लाभ उठा रहा है। परीक्षकों का स्तर भी चिंताजनक है।"
13 दिसंबर, 2024 को BPSC द्वारा आयोजित प्रारंभिक परीक्षा में लगभग 5 लाख उम्मीदवार शामिल हुए थे। यह परीक्षा राज्य के 900 केंद्रों पर आयोजित की गई थी। कथित पेपर लीक की खबरों के बाद छात्र संगठनों और प्रदर्शनकारियों ने परीक्षा रद्द करने की मांग की थी। आयोग ने केवल बापू परीक्षा परिसर से जुड़े 10,000 अभ्यर्थियों के लिए पुनः परीक्षा कराई थी।
अप्रैल 2025 में सुप्रीम कोर्ट का रुख स्पष्ट करते हुए कहा गया कि जब तक समग्र और ठोस साक्ष्य सामने नहीं आते, तब तक मुख्य परीक्षा को रोका नहीं जा सकता। कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को पहले ही पटना हाई कोर्ट जाने को कहा था, जिसने मार्च में यह कहते हुए याचिकाएं खारिज कर दी थीं कि "सभी केंद्रों पर गड़बड़ी के स्पष्ट प्रमाण नहीं हैं।





