रवि किशन ने कहा कि प्रियंका गांधी का भाषण बेहद कमजोर था। उन्होंने कहा कि भाषण में कई त्रुटियां थीं और जब तथ्यों के साथ सत्य को नहीं रखा जाता, तब ऐसी स्थिति उत्पन्न होती है। फिर भी, चूंकि यह उनका सदन में पहला संबोधन था, मैं उन्हें बधाई देता हूं। कल हमारे यशस्वी प्रधानमंत्री मोदी जी विपक्ष के सभी मुद्दों का जवाब देंगे।
प्रियंका गांधी ने सरकार को घेरा था
प्रियंका गांधी ने केंद्र पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार ने पिछले 10 सालों में संविधान के सुरक्षा कवच को कमज़ोर करने का प्रयास किया। सदन में उन्होंने कहा कि हमारा संविधान एक सुरक्षा कवच है, जो नागरिकों की रक्षा करता है। यह न्याय, एकता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का कवच है। उन्होंने कहा कि यह दुखद है कि 10 वर्षों में बड़े-बड़े दावे करने वाली सत्ताधारी पार्टी ने इस कवच को नष्ट करने का प्रयास किया है। संविधान में सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय का वादा है। ये वादे सुरक्षा कवच हैं, जिन्हें तोड़ने का काम आरंभ हो चुका है। सरकार लेटरल एंट्री और निजीकरण के माध्यम से आरक्षण व्यवस्था को कमज़ोर कर रही है।
प्रियंका के संबोधन में संभल का ज़िक्र
संभल हिंसा पर प्रियंका गांधी ने अपने विचार व्यक्त किए। दिल्ली में पीड़ित परिवारों से हुई मुलाकात का उन्होंने विस्तृत वर्णन किया। प्रियंका ने बताया कि संभल से मृतक परिवारों के कुछ सदस्य उनसे मिलने आए थे। उनमें दो बच्चे थे—अदनान और उजैर। एक बच्चा उनके बेटे की उम्र का था, और दूसरा 17 वर्ष का था। उनके पिता, जो एक दर्जी थे, का एक ही सपना था—अपने बच्चों को शिक्षित करना। वह चाहते थे कि एक बेटा डॉक्टर बने और दूसरा भी सफल हो। लेकिन पुलिस ने उनके पिता को गोली मार दी। 17 वर्षीय अदनान ने मुझसे कहा कि वह बड़ा होकर डॉक्टर बनेगा और अपने पिता का सपना पूरा करेगा। यह सपना और आशा उसके दिल में हमारे भारत के संविधान ने जगाई है।





