करनैल सिंह ने अपने इस पत्र में दिल्ली पुलिस आयुक्त से इस संवेदनशील मुद्दे पर त्वरित और उचित कार्रवाई करने की मांग की है।
उन्होंने अपने पत्र में विस्तार से लिखा कि हमारे शहर दिल्ली में सड़कों, फुटपाथों और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर नमाज अदा करने की वजह से यातायात में गंभीर व्यवधान उत्पन्न होता है, जिसके परिणामस्वरूप आम जनता को रोजमर्रा की जिंदगी में काफी असुविधा और कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। कई अवसरों पर, इस प्रथा के कारण एम्बुलेंस जैसी आपातकालीन सेवाएं, स्कूल बसें, और अन्य आवश्यक परिवहन सेवाएं भी प्रभावित होती हैं, जिससे लोगों का जीवन और सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है। उन्होंने आगे जोर देकर कहा कि भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में हर व्यक्ति को अपने धर्म का पालन करने और अपनी आस्था को व्यक्त करने का पूरा अधिकार है, लेकिन यह भी उतना ही आवश्यक है कि ऐसी गतिविधियों से सार्वजनिक व्यवस्था, यातायात की सुगमता और सामाजिक सामंजस्य पर कोई प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।
इसलिए, उन्होंने प्रशासन और पुलिस आयुक्त से विनम्रतापूर्वक अनुरोध किया कि इस विषय पर ठोस और प्रभावी कदम उठाए जाएं ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि सभी धार्मिक गतिविधियां केवल निर्धारित स्थानों, मस्जिदों या निजी परिसरों में ही संपन्न हों, न कि सार्वजनिक सड़कों पर। उन्होंने अपने पत्र के अंत में आशा व्यक्त की कि पुलिस आयुक्त इस मामले को अत्यंत गंभीरता से लेंगे और इसके समाधान के लिए तत्काल उचित कार्रवाई करेंगे, ताकि शहर में शांति, व्यवस्था और नागरिकों की सुविधा बनी रहे।
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