मरांडी ने कहा कि इससे पहले 7 मार्च को रांची में एक कोयला कारोबारी पर जानलेवा हमला हुआ था, लेकिन पुलिस ने इस पर कोई त्वरित कार्रवाई नहीं की, और परिणामस्वरूप अपराधियों ने एक होनहार अधिकारी की जान ले ली।
उन्होंने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री सोरेन के बयानों ने कोयला कारोबार में खून-खराबे का आगाज किया है, और अब यह पूरे राज्य में एक गंभीर समस्या बन गया है। मरांडी ने चिंता जताई कि अगर कोयला चोरी पर जल्द ही नियंत्रण नहीं लगाया गया, तो ऐसी और भी घटनाएं घट सकती हैं, और कई और निर्दोष लोग अपनी जान गंवा सकते हैं। उन्होंने कहा कि झारखंड के विभिन्न इलाकों जैसे धनबाद, बोकारो, रामगढ़, हजारीबाग और चतरा में प्रतिदिन हजारों ट्रक कोयला चोरी हो रहा है, और यह पूरी प्रक्रिया सरकारी तंत्र के संरक्षण में हो रही है। इस चोरबाजारी से होने वाली वसूली का पैसा ऊपर तक पहुंचता है, जिससे भ्रष्टाचार और अपराध को बढ़ावा मिलता है।
मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से यह भी मांग की कि वे कोयला चोरी पर रोक लगाने के लिए तात्कालिक कदम उठाएं। उन्होंने कहा कि एसआईटी का गठन करना जरूरी है, लेकिन यह भी आवश्यक है कि एसआईटी को ईमानदार अधिकारियों के नेतृत्व में गठित किया जाए, क्योंकि जब तक रक्षक खुद भक्षक बने रहेंगे, तब तक इस प्रकार की चोरी और हिंसा पर काबू पाना संभव नहीं होगा।
उन्होंने झारखंड सरकार से यह भी आग्रह किया कि राज्य के डीजीपी को निर्देश दिए जाएं ताकि कोयला कारोबार के सुरक्षित संचालन के लिए परियोजना अधिकारियों, कर्मचारियों और व्यवसायियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। मरांडी ने कहा कि जब तक राज्य सरकार और पुलिस अपराधियों को कड़ी सजा देने के लिए ठोस कदम नहीं उठाती, तब तक इस प्रकार की घटनाओं का सिलसिला चलता रहेगा, और निर्दोष लोगों की जान जाती रहेगी।
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