इसके बाद, ममता बनर्जी के लंदन के ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी लॉ कॉलेज में एक सेशन के दौरान विरोध प्रदर्शन हुआ। वहां के एक कार्यक्रम में ममता के भाषण के दौरान कुछ लोगों ने पोस्टर लहराए और "वापस जाओ" के नारे लगाए। ममता ने इसका विरोध करते हुए कहा कि उन पर हमले हुए थे और अपनी तस्वीरें दिखाते हुए उन्होंने यह दावा किया कि वह मारे जाने वाली थीं। यह तस्वीरें जब भारत पहुंची, तो बिहार में एक बड़ा सियासी विवाद खड़ा हो गया। भाजपा नेताओं ने ममता के खिलाफ अपने हमले तेज कर दिए।
भा.ज.पा. के राष्ट्रीय प्रवक्ता शाहनवाज हुसैन ने ममता के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ममता को बंगाल संभालने की जिम्मेदारी लेनी चाहिए, ऑक्सफोर्ड खुद संभल जाएगा। उन्होंने कहा कि ममता की सरकार का कामकाज अच्छा नहीं है, यही कारण है कि हर जगह विरोध हो रहा है।
भाजपा सांसद संजय जायसवाल ने ममता पर निशाना साधते हुए कहा कि उनकी पूरी राजनीति बांग्लादेशी घुसपैठियों को भारत में लाकर उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने पर टिकी है, जिससे वह वोट बैंक बनाने की कोशिश कर रही हैं। उन्होंने यह भी कहा कि ममता का दिल भारत के खिलाफ है और उनकी नीतियां राष्ट्र विरोधी हैं।
वहीं, बिहार के उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने भी ममता की आलोचना की और कहा कि जिस राह पर ममता बनर्जी चल रही हैं, उस पर चलकर राष्ट्र उनका समर्थन कैसे करेगा। उन्होंने यह भी कहा कि ममता ने सनातन धर्म के अनुयायियों का अपमान किया है, और अब उन्हें इसके परिणाम भुगतने होंगे। केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने ममता के बयान पर सख्त प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि पूरी दुनिया भारत की अर्थव्यवस्था का लोहा मानती है। उन्होंने कहा कि आईएमएफ भी मानता है कि पीएम मोदी के नेतृत्व में भारत की अर्थव्यवस्था तेज़ी से बढ़ रही है, लेकिन ममता बनर्जी सच्चाई को छिपाकर भारत का अपमान कर रही हैं। गिरिराज सिंह ने यह भी कहा कि जब टुकड़े टुकड़े गैंग विदेश जाते हैं, तो वे भारत को अपमानित करते हैं, और ममता का यह बयान भी उसी कड़ी का हिस्सा है, जो दुर्भाग्यपूर्ण है।
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