CCTV फुटेज में साफ दिख रहा है कि चारों अपराधी बिना किसी हड़बड़ी के अस्पताल के ICU तक पहुंचते हैं और चंदन मिश्रा पर ताबड़तोड़ गोलियां बरसाकर बाहर निकल जाते हैं। हैरानी की बात यह है कि जिस ICU में मोबाइल तक प्रतिबंधित है, वहां हथियारों के साथ पहुंच जाना सुरक्षा व्यवस्था की भारी चूक या अंदरूनी मिलीभगत को दर्शाता है। घटना के वक्त अस्पताल के उस हिस्से में कोई सुरक्षाकर्मी मौजूद नहीं था।
चंदन मिश्रा की हत्या के बाद सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल
पारस हॉस्पिटल खुद को अत्यधिक सुरक्षित अस्पताल बताता है। यहां आम मरीजों और परिजनों को ऊंची आवाज़ में बोलने की भी अनुमति नहीं होती, लेकिन हथियारबंद हमलावरों का ICU में दाखिल होना अस्पताल प्रशासन, सुरक्षा गार्ड और बाउंसरों की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। सूत्रों के मुताबिक, पुलिस को सुरक्षा कर्मचारियों की साजिश में संलिप्तता की आशंका है।
पटना पुलिस के मुताबिक, चंदन मिश्रा की हत्या एक पुराने गैंगवार का हिस्सा हो सकती है। मिश्रा और कुख्यात अपराधी शेरू सिंह पहले एक ही गिरोह में थे, लेकिन आपसी मनमुटाव के चलते दोनों के बीच गहरी दुश्मनी हो गई थी। दोनों को पहले फांसी की सजा मिली थी, जिसे बाद में उम्रकैद में बदला गया।
घटना के बाद एसएसपी कार्तिकेय शर्मा खुद मौके पर पहुंचे और पारस हॉस्पिटल को सील कर दिया गया। पटना की सीमाएं बंद कर हर वाहन की गहन जांच की जा रही है। CCTV फुटेज के आधार पर चारों आरोपियों की तस्वीरें जारी की गई हैं और उन्हें बक्सर, भोजपुर, वैशाली सहित आसपास के जिलों के पुलिस अधीक्षकों को भेजा गया है।





