याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया कि बिहार सरकार को पुलों का विस्तृत ऑडिट करने और सुरक्षा जांच की मॉनिटरिंग सुनिश्चित करने का निर्देश दिया जाए। इसके अलावा, राज्य में हाई-लेवल एक्सपर्ट कमेटी गठित करने की भी मांग की गई है, जो सभी पुलों की निगरानी कर कमजोर संरचनाओं की पहचान कर उनकी मरम्मत कराए।
सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना ने रजिस्ट्री को निर्देश दिया कि चार हफ्तों के भीतर मामला पटना हाईकोर्ट को ट्रांसफर किया जाए। बिहार सरकार की ओर से पेश काउंटर पर सीजेआई खन्ना ने टिप्पणी करते हुए कहा, "हमें मालूम है, आपके पास कई योजनाएं हैं।" उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कोर्ट राज्य सरकार की दलीलों को पढ़ चुका है और यह मामला अब हाईकोर्ट में स्थानांतरित किया जा रहा है।
याचिकाकर्ता ने कोर्ट में चिंता जाहिर करते हुए कहा कि बिहार में पुल लगातार गिर रहे हैं, लेकिन उनकी निगरानी और सुरक्षा जांच की कोई उचित व्यवस्था नहीं की गई है। उन्होंने यह भी दावा किया कि अब तक 300 से अधिक पुल ढह चुके हैं और जिम्मेदार अधिकारियों को केवल निलंबित कर दिया जाता है, लेकिन कुछ समय बाद वे वापस बहाल कर दिए जाते हैं।
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