इस सामूहिक इस्तीफे की बड़ी वजह अल्पसंख्यक समुदाय से जुड़े मुद्दों की अनदेखी बताई जा रही है। इस्तीफा देने वाले नेताओं में सुभासपा के अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के संगठन मंत्री जाफर नकवी सहित कई अन्य पदाधिकारी शामिल हैं। इन नेताओं ने आरोप लगाया कि पार्टी में मुस्लिम नेताओं की लगातार उपेक्षा की जा रही है। आरोपों के अनुसार, मजारों और मदरसों पर हो रही सरकारी कार्रवाइयों को लेकर राजभर ने कभी कोई ठोस प्रतिक्रिया नहीं दी। नेताओं का कहना है कि वे बार-बार इस मसले को पार्टी नेतृत्व के सामने रखते रहे, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
एक साझा पत्र में आरोप लगाया गया कि ओम प्रकाश राजभर सिर्फ अपने समुदाय को प्राथमिकता दे रहे हैं और सत्ता के लालच में अल्पसंख्यकों के मुद्दों को दरकिनार कर रहे हैं।
नेताओं का कहना है कि मंत्री पद बचाने के लिए उन्होंने उन तमाम घटनाओं पर चुप्पी साध रखी है, जो मुस्लिम समुदाय को प्रभावित कर रही हैं। साथ ही यह भी आरोप लगा कि पार्टी अब अपने मूल विचारों और सिद्धांतों से भटक चुकी है।
इन आरोपों और बड़े पैमाने पर हुए इस्तीफों के बाद ओम प्रकाश राजभर ने पलटवार करते हुए बयान दिया। उन्होंने इस्तीफा देने वालों को ‘जाहिल’ कहकर संबोधित किया और कहा कि ये वे लोग हैं जो राजनीतिक दलों में लाभ और पद की उम्मीद में घूमते हैं, और जब बात नहीं बनती तो सुर्खियों में आने के लिए इस तरह के कदम उठाते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि जैसे लोग संकट के समय हनुमान चालीसा पढ़ते हैं, वैसे अब कुछ लोग उन्हें लेकर ‘ओम प्रकाश चालीसा’ पढ़ रहे हैं।
इस पूरी घटना ने सुभासपा के आंतरिक संगठन और भाजपा के साथ उसके गठबंधन की स्थिरता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि पार्टी इस संकट से कैसे बाहर निकलती है और आगामी चुनावों में इसका क्या असर पड़ेगा।





