सुप्रीम कोर्ट ने किया था सजा को निलंबित
इसी सजा के खिलाफ अफजाल अंसारी ने पहले भी इलाहाबाद हाई कोर्ट में सजा रद्द करने के लिए याचिका दायर की थी। लेकिन कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया था। जिसके बाद सपा सांसद सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे। सुप्रीम कोर्ट ने सजा को निलंबित करते हुए मामले को फिर से इलाहाबाद हाई कोर्ट के पास भेज दिया था। जब अफजाल अंसारी को हाईकोर्ट द्वारा चार साल की सजा सुनाई गयी थी तब वह जेल भी गए थे और उनकी संसद सदस्यता भी चली गई थी। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने सजा पर रोक लगा दी थी जिसके बाद उनकी संसद सदस्यता फिर से बहाल हो गई थी।
राजनीतिक बदला लेने के लिए किया केस दर्ज
अफजाल अंसारी की ओर से दलील रखने वाले वरिष्ट अधिवक्ता गोपाल चतुर्वेदी ने कहा कि अभियोजन पक्ष ने जो गैंग चार्ट बनाया है उसमें कई सदस्यों के नाम है लेकिन गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई केवल तीन लोगों के खिलाफ हुई। ट्रायल कोर्ट में विवेचक के बयान से यह भी स्पष्ट है कि ऐसा राजनीतिक बदला लेने के लिए किया गया। इसके अलावा जिस मूल मुकदमे के आधार पर अफजाल अंसारी को गैंगस्टर एक्ट में सजा सुनाई गई, उस मामले में उन्हें बरी किया जा चुका है और गैंगस्टर एक्ट के इस मुकदमे के बाद उनके खिलाफ दो ही मामले दर्ज हुए और वे भी 2009 एवं 2014 के चुनाव को लेकर जन प्रतिनिधित्व अधिनियम से जुड़े है।
विवेचक ने ट्रायल कोर्ट में अपने बयान में कहा था कि चार साल तक वह मोहम्मदाबाद थाने के इंचार्ज रहे, अफजाल अंसारी के खिलाफ मुकदमा तो क्या किसी ने छोटी मोटी शिकायत भी नहीं की। ऐसे में अफजाल अंसारी की सजा बढ़ाने का कोई सवाल ही नहीं पैदा होता। राजनितिक बदले से जुड़े इस मुकदमों में कानून के मुताबिक गैंगस्टर एक्ट लागू ही नहीं होता इसलिए अफजाल अंसारी को सुनाई गई सजा निरस्त की जानी चाहिए।





