एक वरिष्ठ नेता के अनुसार, इसका मतलब यह नहीं है कि कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष अरविंदर सिंह लवली और राजकुमार चौहान जैसे अनुभवी नेताओं को दरकिनार कर दिया जाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने अंतरराष्ट्रीय दौरे से लौट चुके हैं, और माना जा रहा है कि शनिवार को संसदीय बोर्ड की बैठक में मुख्यमंत्री पद पर फैसला लिया जा सकता है।
कैसे तय होगा मुख्यमंत्री पद का नाम?
सूत्रों के अनुसार, बैठक के बाद पार्टी पर्यवेक्षकों की नियुक्ति करेगी, जिनमें किसी बीजेपी शासित राज्य के मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्रिमंडल के एक वरिष्ठ सांसद को शामिल किया जाएगा। यही पर्यवेक्षक 48 विधायकों की बैठक की अध्यक्षता करेंगे और दिल्ली के अगले मुख्यमंत्री के नाम पर अंतिम मुहर लगाएंगे।
किन मानदंडों पर होगा मंत्रिमंडल का गठन?
बीजेपी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के शीर्ष पदाधिकारियों ने मंत्रिमंडल और मुख्यमंत्री पद के चयन के लिए कुछ अहम मानदंड तय किए हैं, जिनमें शामिल हैं: युवा चेहरों को मौका देना, लिंग (जेंडर) संतुलन बनाए रखना, जातीय और सामुदायिक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करना, संगठनात्मक अनुभव को प्राथमिकता देना । बीजेपी के सूत्रों के मुताबिक, पार्टी आने वाले दिनों में मंत्रिमंडल, विधानसभा और संगठन में युवाओं और अनुभवी नेताओं के बीच संतुलन बनाने की कोशिश करेगी।
एक वरिष्ठ नेता ने कहा,
"बीजेपी अपने समर्पित कार्यकर्ताओं की कड़ी मेहनत और वफादारी को हमेशा महत्व देती है। इसलिए, नए विधायकों, जो पार्टी संगठन से जुड़े हुए हैं और लंबे समय से पार्टी के लिए काम कर रहे हैं, उन्हें प्राथमिकता दी जाएगी।"
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