हालांकि, दुनिया के सबसे बड़े मुस्लिम आबादी वाले देश इंडोनेशिया ने आतंकवाद के खिलाफ भारत का साथ देते हुए इन दोनों को ढूंढ निकाला और भारत को सौंप दिया।
यह प्रत्यर्पण केवल कानूनी या सुरक्षा एजेंसियों के आपसी सहयोग का मामला नहीं था, बल्कि इसके पीछे भारत की गहरी कूटनीतिक योजना और रणनीतिक प्रयास थे। भारत और इंडोनेशिया के बीच ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक संबंध हमेशा से मजबूत रहे हैं, और यह मामला उन संबंधों की एक बड़ी मिसाल बनकर सामने आया है।
जनवरी 2025 में गणतंत्र दिवस के अवसर पर इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो भारत के मुख्य अतिथि के तौर पर आए थे। यह दौरा केवल एक औपचारिक राजकीय यात्रा नहीं था, बल्कि दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को नई ऊंचाई पर ले जाने की दिशा में एक ठोस कदम था। भारत यात्रा के दौरान राष्ट्रपति सुबियांतो ने आतंकवाद को वैश्विक खतरा बताते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सुर में सुर मिलाया और आतंक के खिलाफ मिलकर लड़ने का संकल्प जताया था।
इसी दौरान उनके पाकिस्तान जाने की योजना भी थी, लेकिन भारत की आपत्ति के बाद उन्होंने वह दौरा रद्द कर दिया और भारत में ही अपनी उपस्थिति को बढ़ा दिया। इससे यह स्पष्ट हो गया कि इंडोनेशिया भारत के साथ अपने रिश्तों को कितनी प्राथमिकता देता है।
इस पूरे घटनाक्रम में एक महत्वपूर्ण मोड़ तब आया जब हाल ही में इंडोनेशिया में तैनात भारतीय राजदूत ने राष्ट्रपति सुबियांतो से मुलाकात की। विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार, इस बैठक में पहलगाम आतंकी हमले और भारत में सक्रिय इस्लामिक स्टेट के स्लीपर सेल्स पर गहन चर्चा हुई। राजदूत ने अब्दुल्ला फयाज और ताल्हा खान से जुड़ी सूचनाएं साझा कीं और प्रत्यर्पण की मांग रखी। राष्ट्रपति सुबियांतो ने स्पष्ट रूप से कहा कि उनका देश आतंकवाद का समर्थन नहीं करता और इस्लाम की आड़ में हिंसा फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
इंडोनेशिया न केवल प्रत्यर्पण के लिए राजी हुआ, बल्कि उसने इसे पूरी गंभीरता के साथ अंजाम तक भी पहुंचाया। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया जब हाल ही में हुए पहलगाम हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनावपूर्ण हालात बने हुए हैं। कुछ दिनों तक दोनों देशों के बीच युद्ध जैसे हालात भी नजर आए। ऐसे वक्त में इंडोनेशिया का यह समर्थन भारत की अंतरराष्ट्रीय स्थिति को मजबूत करता है और यह संदेश देता है कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में भारत अकेला नहीं है।
इसके अतिरिक्त, इंडोनेशिया ने इस्लामिक सहयोग संगठन (OIC) में भी भारत का पक्ष मजबूती से रखा, जो कि अपने आप में एक अहम संकेत है। अक्सर OIC मंच पर पाकिस्तान भारत के खिलाफ एजेंडा चलाने की कोशिश करता रहा है, लेकिन इस बार इंडोनेशिया ने भारत की स्थिति को समझते हुए उसका समर्थन किया।
अब्दुल्ला फयाज और ताल्हा खान की गिरफ्तारी न सिर्फ एक बड़ी सुरक्षा उपलब्धि है, बल्कि यह भारत की वैश्विक कूटनीतिक क्षमता और विदेश नीति की सफलता का भी प्रमाण है।





