अवधेश प्रसाद की यह भावनात्मक प्रतिक्रिया उस वक्त सामने आई जब उन्होंने रविवार को अयोध्या में पुलिस के खिलाफ आरोप लगाते हुए प्रेस कांफ्रेंस में नृशंस हत्या की शिकार हुई युवती की स्थिति के बारे में बयान दिया था। इस दौरान उन्होंने परिवार के दुख और शोक की गहरी अभिव्यक्ति की, जो सुनते ही वह फफक पड़े। इसके बाद सीएम योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या पहुंचकर अवधेश प्रसाद के आंसुओं को केवल नौटंकी करार दिया, जिससे मामला और भी गरमा गया।
सोमवार को समाजवादी पार्टी की जनसभा में, अवधेश प्रसाद ने योगी आदित्यनाथ पर निशाना साधते हुए कहा कि मुख्यमंत्री ने न केवल उन्हें गालियां दीं, बल्कि उन्हें कुत्ते जैसा भी महसूस कराया। उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि योगी सरकार के मंत्रियों ने कहा कि अयोध्या के लोग दलित को सांसद बनाए हैं, जो यहां की गरिमा को घटित कर रहे हैं। अवधेश ने इसका विरोध करते हुए कहा कि यह दलित समाज का घोर अपमान है, जो राजनीतिक दुराचार को दर्शाता है।
अखिलेश यादव ने इस मौके पर कहा कि अयोध्या में जो हालात बने, वह बयां करते हुए कहा कि जब एक परिवार अपनी बेटी को खोजने निकला और उसे उसकी लाश मिली, तो यह न केवल एक निजी त्रासदी है, बल्कि सरकार की नाकामी का भी प्रतीक है। उन्होंने कहा कि जो लोग इसके बाद भी अपने आंसुओं को सही मानते हुए संघर्ष करते हैं, उनके बारे में यह आरोप लगाना कि वे ढोंग कर रहे हैं, यह बेहद दुखद है।
अखिलेश यादव ने आगे कहा कि अगर बेटियों के खिलाफ सबसे ज्यादा अत्याचार कहीं हो रहा है, तो वह उत्तर प्रदेश में हो रहा है, जहां सरकार अपनी जिम्मेदारियों से मुंह चुराती है। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि सरकार ने समय पर काम किया होता, तो एंबुलेंस और राहत कार्य तुरंत सक्रिय होते और महाकुंभ के दौरान भगदड़ जैसी घटनाओं में कम से कम जनहानि होती।
अखिलेश ने भी यह दावा किया कि समाजवादियों द्वारा शुरू की गई एंबुलेंस सेवा ही महाकुंभ के दौरान काम आई, जबकि योगी सरकार के लिए यह एक बड़ी विफलता साबित हुई।
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