इसी तरह, आज देवेंद्र फडणवीस भी सत्ता के लिए धर्म का इस्तेमाल कर रहे हैं।
सपकाल ने कहा, "कुछ लोग यह कहते हैं कि औरंगजेब की मजार को तबाह कर दिया जाना चाहिए, लेकिन यह मजार छत्रपति शिवाजी महाराज की महानता का प्रतीक है। अगर इस मजार को नष्ट किया गया, तो यह केवल छत्रपति शिवाजी महाराज के इतिहास को मिटाने की साजिश होगी।" उन्होंने आरोप लगाया कि इस तरह की गतिविधियों को बढ़ावा देने वाली संगठन जैसे बजरंग दल और विश्व हिंदू परिषद औरंगजेब की मजार को नष्ट करने की धमकी दे रहे हैं। यह मजार छत्रपति संभाजीनगर के खुल्दाबाद क्षेत्र में स्थित है, और यह आज भी एक विवाद का केंद्र बना हुआ है।
सपकाल के बयान पर भारतीय जनता पार्टी (भा.ज.पा.) ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। भाजपा नेता चंद्रशेखर बावनकुले ने कहा, "हर्षवर्धन सपकाल का बयान न केवल बेहूदा है, बल्कि यह बच्चों जैसा भी है। वे इस तरह की गैर जिम्मेदार बातें करके महाराष्ट्र की राजनीतिक संस्कृति को बिगाड़ रहे हैं।" उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस और सपकाल के बयान से यह साफ है कि वे महाराष्ट्र की पहचान और उसके इतिहास पर हमला कर रहे हैं, जो पूरी तरह से अस्वीकार्य है।
यह सियासी विवाद तब और बढ़ गया जब समाजवादी पार्टी के नेता अबू आजमी ने औरंगजेब को एक महान शासक बताया था। उन्होंने कहा कि औरंगजेब के शासनकाल में भारत की जीडीपी दुनिया में 24 फीसदी थी, और तब भारत को 'सोने की चिड़ीया' कहा जाता था। यह बयान उन्होंने ब्लॉकबस्टर फिल्म 'छावा' के संदर्भ में दिया था, जो छत्रपति संभाजी महाराज के जीवन पर आधारित है। छत्रपति संभाजी महाराज, शिवाजी महाराज के साहसी और वीर बेटे थे, और उनकी बहादुरी आज भी महाराष्ट्र में सम्मानित है।
इस सियासी संग्राम ने महाराष्ट्र की राजनीति को एक नए मोड़ पर लाकर खड़ा कर दिया है। दोनों पक्षों ने अपनी बात रखी है, और इस विवाद के आस-पास सियासी बयानबाजी का दौर जारी है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि इस विवाद का अंत किस दिशा में होता है और क्या औरंगजेब की मजार को लेकर आने वाले समय में कोई बड़ा कदम उठाया जाएगा।
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