बर्नी सैंडर्स का आरोप
बर्नी सैंडर्स, जो लंबे समय से कर्मचारियों के अधिकारों के पक्षधर रहे हैं, ने हाल ही में एक बयान में कहा कि एच-1बी वीजा का उद्देश्य कुशल कर्मचारियों की कमी को पूरा करना नहीं है, बल्कि यह वीजा सस्ते श्रमिकों को नियुक्त करने और श्रम लागत को कम करने के लिए एक उपकरण बन गया है। उन्होंने यह भी दावा किया कि इस वीजा के माध्यम से अमेरिकी अरबपतियों को लाभ हो रहा है, और कंपनियां अमेरिकी कर्मचारियों की बजाय सस्ते विदेशी श्रमिकों को प्राथमिकता दे रही हैं।
सैंडर्स ने उदाहरण के तौर पर टेस्ला का नाम लिया, जहां पिछले साल करीब साढ़े सात हजार अमेरिकी कर्मचारियों को नौकरी से निकाला गया, जबकि एच-1बी वीजा धारक कर्मचारियों को नौकरी से नहीं हटाया गया। उनका कहना था कि एच-1बी वीजा को फिर से परिभाषित और संशोधित किया जाना चाहिए ताकि इसका कोई नकारात्मक प्रभाव अमेरिकी श्रमिकों पर न पड़े।
एलन मस्क का समर्थन
एलन मस्क, जो एच-1बी वीजा के समर्थन में हैं, ने इसे अमेरिका में कुशल कर्मचारियों की कमी को पूरा करने के लिए जरूरी बताया है। मस्क का कहना है कि इस वीजा के माध्यम से अमेरिका में कई इंजीनियर आए हैं जिन्होंने अमेरिका के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया। हालांकि, बर्नी सैंडर्स ने मस्क के इस दावे पर पलटवार करते हुए कहा कि टेस्ला में कई एच-1बी वीजा धारक अकाउंटेंट और मैकेनिकल इंजीनियर हैं, जो उच्च प्रशिक्षित श्रमिकों की श्रेणी में नहीं आते।
ट्रंप समर्थकों का विरोध
यह पहली बार नहीं है जब एच-1बी वीजा को लेकर विवाद उठा है। इससे पहले ट्रंप समर्थक लॉरा लूमर और स्टीव बैनन जैसे नेताओं ने इस वीजा का विरोध किया था और दावा किया था कि यह अमेरिकी नागरिकों की नौकरियां छीनने का कारण बन रहा है। इस विरोध के बावजूद, एलन मस्क ने इसका समर्थन किया और डोनाल्ड ट्रंप ने भी एच-1बी वीजा को जारी रखने की बात की थी।
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