वहीं, सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडे के नेतृत्व में एक सपा प्रतिनिधिमंडल को संभल जाने से रोके जाने पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की है। शनिवार सुबह लखनऊ में माता प्रसाद पांडे के घर के बाहर पुलिस बल तैनात कर दिया गया था। सपा प्रमुख ने सोशल नेटवर्किंग साइट 'एक्स' पर पोस्ट कर भाजपा सरकार पर निशाना साधा, कहा कि प्रतिबंध लगाना सरकार की विफलता दर्शाता है। उन्होंने कहा कि अगर सरकार ने पहले ही उन लोगों पर कार्रवाई की होती जिन्होंने दंगा भड़काने की कोशिश की और उन्मादी नारे लगवाए, तो संभल में शांति भंग नहीं होती।
क्या है पूरा मामला
हिंदू पक्ष ने 19 नवंबर को एक सिविल मुकदमा दायर किया था। मुकदमे में दावा किया गया था कि संभल की शाही मस्जिद 1529 में मुगल सम्राट बाबर के शासनकाल में हरिहर मंदिर के खंडहरों पर निर्मित की गई थी। याचिकाकर्ताओं ने मस्जिद के सर्वेक्षण की मांग की थी। अदालत ने दावे की जांच के लिए एक वकील को कोर्ट कमिश्नर नियुक्त किया। उसी दिन (19 नवंबर) को कोर्ट कमिश्नर के नेतृत्व में एक टीम ने जिलाधिकारी राजेंद्र पेंसिया, पुलिस अधीक्षक केके बिश्नोई और राज्य व केंद्र सरकार के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में मस्जिद का सर्वेक्षण किया। टीम ने 24 नवंबर को दूसरा सर्वेक्षण किया, जिस दौरान क्षेत्र में हिंसा भड़क उठी और चार लोगों की जान चली गई।





