अखिलेश यादव ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि सरकार के बहकावे में आने से बचें और उनके द्वारा की जा रही गलत बयानी पर ध्यान न दें। उन्होंने कहा कि अब तो साधु-संत भी मुख्यमंत्री पर आरोप लगा रहे हैं, कुछ सीधे-सीधे तो कुछ बिन बोले। उनका कहना था कि जब साधु-संत मुख्यमंत्री को झूठा कह सकते हैं तो यह सरकार की नैतिक हार को दर्शाता है। उन्होंने यह भी कहा कि वीआईपी लोगों के लिए अलग इंतजाम था, लेकिन हादसा उस स्थान पर हुआ जहां आम लोगों के लिए स्नान की व्यवस्था की गई थी। अखिलेश ने सवाल उठाया कि जब सरकार ने आम लोगों को आमंत्रित किया था, तो क्या उनके लिए उचित इंतजाम किए गए थे?
अखिलेश यादव ने स्पष्ट किया कि इस समय का मुख्य उद्देश्य बजट पर चर्चा नहीं, बल्कि कुंभ में मारे गए लोगों की शांति के लिए बात करना है। उन्होंने सरकार से मांग की कि मृतकों की सही संख्या और उनके नामों की सूची जारी की जाए, ताकि उनके परिवारों को सम्मान के साथ अंतिम संस्कार का मौका मिल सके। उन्होंने कहा कि सरकार को अपनी नाकामी छिपाने के बजाय सच्चाई को सामने लाना चाहिए और जिन लोग अभी भी रास्तों पर फंसे हैं, उनके लिए जरूरी इंतजाम करने चाहिए।
अखिलेश ने प्रशासन की आलोचना करते हुए कहा कि झूंसी में हुई दूसरी भगदड़ पर भी प्रशासन ने कोई जानकारी नहीं दी, जो कि और भी चिंताजनक है।
उन्होंने यह भी कहा कि विपक्ष और समाजवादी पार्टी का यह आरोप है कि जब इतनी भारी भीड़ को कुंभ में बुलाया गया, तो उनके लिए प्रशासन ने कोई उचित इंतजाम नहीं किया। उनका कहना था कि अगर सरकार लोगों को आमंत्रित करती है, तो उसके बाद उनकी सुरक्षा और अन्य सुविधाओं के लिए जिम्मेदारी बनती है, जो कि इस घटना में नदारद रही।
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