इससे पहले, उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने मीडिया से बातचीत में कहा था कि महाकुंभ के दौरान आयोजित होने वाली कैबिनेट बैठक में कई महत्वपूर्ण फैसले लिए जाएंगे। इसके बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उनके कैबिनेट सदस्य त्रिवेणी संगम में पवित्र डुबकी लगाएंगे। यह बैठक राज्य के लिए महत्वपूर्ण योजनाओं और प्रस्तावों पर चर्चा करने का अवसर बनेगी। कैबिनेट बैठक में राज्य की समग्र प्रगति और विकास से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर विचार किया जाएगा, जिनसे प्रदेश के विकास में तेजी आएगी।
यह पहली बार नहीं है जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उनका मंत्रिमंडल कुंभ मेला में पहुंचे हैं। इससे पहले 2019 में भी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने मंत्रियों और अन्य संतों के साथ संगम में औपचारिक रूप से डुबकी लगाई थी। उस समय भी योगी सरकार ने महाकुंभ के आयोजन को धार्मिक और सामाजिक सद्भाव को बढ़ावा देने के एक अवसर के रूप में देखा था।
महाकुंभ का आयोजन दुनिया के सबसे बड़े और महत्वपूर्ण धार्मिक मेलों में से एक है, और यह हर 12 साल में आयोजित होता है। इस साल महाकुंभ का आयोजन 13 जनवरी से शुरू होकर 26 फरवरी तक जारी रहेगा। इस दौरान प्रमुख स्नान तिथियां भी निर्धारित की गई हैं, जिनमें 29 जनवरी (मौनी अमावस्या), 3 फरवरी (बसंत पंचमी), 12 फरवरी (माघी पूर्णिमा), और 14 फरवरी (महा शिवरात्रि) शामिल हैं। इन तिथियों पर लाखों श्रद्धालु संगम के पवित्र जल में स्नान करने के लिए आएंगे।
इस विशाल धार्मिक आयोजन की सुरक्षा के लिए उत्तर प्रदेश पुलिस ने 10,000 से अधिक कर्मियों की तैनाती की है। इसमें पुलिस, अर्धसैनिक बलों और अन्य सुरक्षा एजेंसियों के कर्मी शामिल हैं।
इसके अलावा, राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ) ने संगम पर श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए "जल एम्बुलेंस" तैनात की है, ताकि किसी भी आपातकालीन स्थिति से निपटा जा सके। इस आयोजन के दौरान श्रद्धालुओं की सुरक्षा को लेकर उच्चतम स्तर की तैयारी की गई है।
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