अबू आजमी ने कहा, "मेरे बयान को गलत संदर्भ में प्रस्तुत किया गया है। मैंने वही कहा है जो इतिहासकारों और लेखकों ने औरंगजेब रहमतुल्ला अली के बारे में लिखा है। मैंने कभी छत्रपति शिवाजी महाराज, संभाजी महाराज या किसी अन्य महापुरुष के खिलाफ कोई अपमानजनक टिप्पणी नहीं की। फिर भी, यदि मेरे शब्दों से किसी को ठेस पहुंची है, तो मैं अपने बयान को पूरी तरह से वापस लेता हूं।"
उन्होंने यह भी कहा कि इस पूरे मुद्दे को अनावश्यक रूप से राजनीतिक रंग दिया जा रहा है, जिससे महाराष्ट्र विधानसभा के बजट सत्र का माहौल प्रभावित हो रहा है। उन्होंने कहा, "इस विवाद की वजह से सत्र बाधित हो रहा है और इसका नुकसान महाराष्ट्र के आम लोगों को उठाना पड़ रहा है।"
क्या कहा था अबू आजमी ने?
समाजवादी पार्टी के महाराष्ट्र अध्यक्ष अबू आजमी ने सोमवार को औरंगजेब को लेकर बयान दिया था। उन्होंने कहा था,
"गलत इतिहास पढ़ाया गया है। औरंगजेब को एक क्रूर शासक बताया गया है, लेकिन उन्होंने कई मंदिरों का निर्माण करवाया था। वह कोई निर्दयी शासक नहीं थे।"
आजमी ने यह भी दावा किया था कि, "बनारस में जब एक पंडित की बेटी के साथ उनके एक सैनिक ने बदसलूकी करने की कोशिश की, तो औरंगजेब ने उसे दो हाथियों के बीच बंधवाकर मरवा डाला। इसके बाद उन पंडितों ने औरंगजेब के सम्मान में एक मस्जिद का निर्माण करवाया।"
उन्होंने आगे कहा था कि, "औरंगजेब एक कुशल प्रशासक थे। उनके शासनकाल में भारत की जीडीपी 24% थी, और उस समय देश को 'सोने की चिड़िया' कहा जाता था। इतिहास में कई गलत बातें फैलाई गई हैं।"
राजनीतिक विवाद और प्रतिक्रिया
अबू आजमी के इस बयान के बाद महाराष्ट्र विधानसभा में जमकर हंगामा हुआ। भाजपा और शिवसेना के विधायकों ने उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। यहां तक कि मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने उन्हें "देशद्रोही" बताते हुए उनके निलंबन की मांग कर दी।
अबू आजमी के बयान पर हो रही तीखी प्रतिक्रियाओं और बढ़ते विवाद के बाद उन्होंने सफाई देते हुए अपने शब्दों को वापस ले लिया। उन्होंने कहा कि, "मैं किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाने के लिए नहीं, बल्कि ऐतिहासिक तथ्यों को सामने रखने के लिए बोल रहा था। फिर भी, यदि मेरे शब्दों से किसी को ठेस पहुंची है, तो मैं बिना शर्त अपना बयान वापस लेता हूं।"
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