उन्होंने यह भी कहा कि पंजाब राज्य, जहां आम आदमी पार्टी की सरकार है, का प्रतिनिधित्व इस परिसीमन में घट सकता है, भले ही कुछ सीटें बढ़ें। लेकिन जब लोकसभा में कुल सीटें 850 हो जाएंगी, तो पंजाब का प्रतिशत कम हो जाएगा, जो राज्य के लिए नकारात्मक साबित हो सकता है।
संजय सिंह ने भारतीय जनता पार्टी पर तंज करते हुए कहा, "यह नहीं हो सकता कि सारी समझदारी सिर्फ भाजपाइयों के पास हो। भाजपा को लगता है कि वे जहां भी प्रभावी हैं, वहां सीटें बढ़ा लेंगे और नरेंद्र मोदी हमेशा के लिए प्रधानमंत्री बने रहेंगे। हम ऐसी साजिशों को सफल नहीं होने देंगे। हम यह सुनिश्चित करेंगे कि किसी भी राज्य के साथ अन्याय न हो।"
इसके अलावा, संजय सिंह ने भाजपा पर तीखा हमला करते हुए कहा, "भाजपा ने त्योहारों को भी विवादित बना दिया है। होली, दिवाली और ईद जैसे त्योहारों को अब विवादों का त्यौहार बना दिया गया है। अब किसी भी त्योहार के मौके पर भाजपा और मीडिया का ध्यान इस बात पर होता है कि किस तरह से देश में नफरत फैलायी जा सकती है। यह एक बहुत खतरनाक प्रवृत्ति है, और हमें इसे रोकना होगा ताकि हमारे त्योहार शांति और सौहार्द से मनाए जा सकें।"
इतिहास पढ़ाने के मुद्दे पर संजय सिंह ने कहा, "यह समय है कि बच्चों को भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के उन पहलुओं के बारे में भी बताया जाए, जिनमें भाजपा के पुरखों का नाम शामिल है।
योगी आदित्यनाथ और भाजपा के पूर्व नेताओं ने स्वतंत्रता संग्राम में अंग्रेजों का साथ दिया। आरएसएस ने तिरंगे का विरोध किया, और श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने ब्रिटिश गवर्नर को पत्र लिखकर स्वतंत्रता संग्राम को कुचलने की अपील की थी। यह इतिहास बच्चों को पढ़ाया जाना चाहिए ताकि वे जान सकें कि कौन भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का हिस्सा था और कौन नहीं।"
परिसीमन विवाद
यह विवाद इसलिए उत्पन्न हुआ है क्योंकि आगामी परिसीमन में लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ने की संभावना है। यदि परिसीमन केवल जनसंख्या के आधार पर किया जाता है, तो यह दक्षिणी राज्यों के लिए एक बड़ा नुकसान हो सकता है, क्योंकि इन राज्यों की जनसंख्या अन्य राज्यों के मुकाबले अधिक स्थिर रही है। इस वजह से, दक्षिण भारत के राज्य इस परिसीमन के खिलाफ हैं। तमिलनाडु से डीएमके सांसद डीएम कथिर आनंद ने इस मुद्दे को लोकसभा में उठाते हुए कहा कि परिसीमन सिर्फ जनसंख्या के आधार पर नहीं होना चाहिए। उन्होंने इसके लिए अन्य मानदंडों की भी आवश्यकता जताई, जैसे कि राज्य की प्रति व्यक्ति आय, वस्तु एवं सेवा कर (GST) संग्रह, कृषि आय, और निर्यात की स्थिति, ताकि कोई राज्य अप्रतिबंधित रूप से नुकसान में न हो।
इस मुद्दे पर चर्चा को और बढ़ावा देने के लिए, डीएमके ने 22 मार्च को चेन्नई में एक सर्वदलीय बैठक बुलाई है, जिसमें दक्षिण भारत के सभी प्रमुख नेताओं को एक मंच पर लाकर लोकसभा निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन पर चर्चा की जाएगी।
यह बैठक एक महत्वपूर्ण कदम है, जिससे इस विवाद का समाधान निकाला जा सकता है और सुनिश्चित किया जा सकता है कि परिसीमन की प्रक्रिया में सभी राज्यों को समान अवसर मिलें।
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