अदालत ने यह निर्देश तब दिया, जब प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के उप निदेशक दीपिन गोयल ने अदालत के समक्ष यह कहा कि आरोपियों को जो दस्तावेज़ की कॉपियां दी गई हैं, वे विभाग के पास उपलब्ध सबसे अच्छी और सही कॉपियां हैं।
जज ने मामले में हुई देरी और 25 जनवरी को सुनवाई के दौरान ईडी के वकील की अनुपस्थिति पर भी ध्यान दिया। अदालत ने इस देरी पर गंभीरता से गौर किया और कहा कि इस मामले में उत्पन्न हुई अनावश्यक देरी को देखते हुए, साथ ही 28 मार्च 2024 को दिए गए आदेश पत्रों के तहत दस्तावेजों की स्पष्ट और सही प्रतियां उपलब्ध कराए जाने को लेकर अदालत को अब यह कदम उठाना जरूरी लगा।
जज ने कहा कि इस स्थिति में ईडी के निदेशक को जांच अधिकारी के साथ अदालत में उपस्थित होकर आरोपियों को दिए जाने वाले दस्तावेजों की स्थिति लिखित रूप में प्रस्तुत करना चाहिए, ताकि मामले की प्रगति सुनिश्चित हो सके और आरोपियों को पूरी पारदर्शिता के साथ दस्तावेज़ मिल सकें।
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