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‘Mahakumbh में 15 हजार लोग लापता- सरकार अब डाटा देने से मना कर रही’- सपा नेता रामगोपाल यादव का बड़ा दावा

महाकुंभ में मची भगदड़ को लेकर संसद में हुए हंगामे के बाद समाजवादी पार्टी के सांसद रामगोपाल यादव ने एक और गंभीर दावा किया है। उनका कहना है कि महाकुंभ में |

‘Mahakumbh में 15 हजार लोग लापता- सरकार अब डाटा देने से मना कर रही’- सपा नेता रामगोपाल यादव का बड़ा दावा
फोटो: Ram Gopal Yadav
महाकुंभ में मची भगदड़ को लेकर संसद में हुए हंगामे के बाद समाजवादी पार्टी के सांसद रामगोपाल यादव ने एक और गंभीर दावा किया है। उनका कहना है कि महाकुंभ में 15 हजार लोगों ने शिकायत दर्ज कराई है कि उनके परिवार के सदस्य लापता हो गए हैं। यादव ने आरोप लगाया कि सरकार इन लापता लोगों के बारे में कोई भी जानकारी देने से इंकार कर रही है और यह स्थिति गंभीर है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि 1954 के प्रयाग कुंभ में हुई भगदड़ के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने संसद में मारे गए और घायल हुए लोगों की संख्या का विवरण दिया था, जबकि आज योगी आदित्यनाथ का प्रशासन केवल वीआईपी लोगों को सुविधाएं देने में व्यस्त है। 

इस दौरान आम आदमी की कोई चिंता नहीं हो रही है। यादव ने कहा, "योगी सरकार केवल वीआईपी लेन की सफाई और सुव्यवस्था में जुटी रही, जबकि आम लोग अगर डूब जाएं या मर जाएं, तो उसकी किसी को परवाह नहीं है।" सोमवार को बजट सत्र के दौरान विपक्षी सांसदों ने लोकसभा और राज्यसभा में जमकर हंगामा किया और महाकुंभ में मची भगदड़ पर चर्चा की मांग की। समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा कि सरकार मृतकों की सही संख्या को छुपा रही है और यह बेहद निंदनीय है। यादव ने आरोप लगाया कि सरकार केवल डुबकी लगाने वाले श्रद्धालुओं के आंकड़े तो दिन-प्रतिदिन जारी करती है, लेकिन मरने वालों की संख्या अब तक स्पष्ट नहीं की गई है। 

 इस बीच, बीजेडी की सदस्य सुलता देव ने महाकुंभ में एआई जैसी अत्याधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करने के बावजूद मृतकों और लापता श्रद्धालुओं की संख्या का सही आंकड़ा नहीं जुटाए जाने पर सवाल उठाया। उन्होंने राज्यसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान कहा कि जब दिल्ली में जलजमाव की घटना में छात्रों की मौत हुई थी, तब उस पर अल्पकालिक चर्चा हुई थी, तो महाकुंभ में हुई इस घटना पर चर्चा क्यों नहीं हो सकती है? उन्होंने सवाल उठाया कि अगर एआई से हम भीड़ की संख्या का अनुमान लगा सकते हैं, तो क्यों नहीं तकनीकी मदद से यह जान सकते कि कितने लोग लापता हैं और उनका पता क्यों नहीं लगाया जा रहा है।

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