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राजद्रोह कानून पर सुनवाई करेगा सुप्रीम कोर्ट

राजद्रोह कानून पर सुनवाई करेगा सुप्रीम कोर्ट
फोटो: राजद्रोह कानून पर सुनवाई करेगा सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने राजद्रोह कानून की वैधता की जांच को फिलहाल टाल देने के केंद्र के अनुरोध को अस्वीकार कर दिया है। केंद्र की भाजपा सरकार ने नए बिल का हवाला दते हुए कहा है कि नया बिल एक स्थायी समिति के समक्ष विचाराधीन है, इसलिए फिलहाल सुनवाई टाल दी जाए। इस पर मुख्य न्यायधीश चंद्रचूड़ ने कहा कि 'भले ही नया विधेयक कानून बन जाए, लेकिन नए कानून का पिछले मामलों पर कोई असर नहीं पड़ेगा।आपको बता दें कि भारत के वर्तमान गृहमंत्री अमित शाह ने 11 अगस्त 2023 को लोकसभा में 163 साल पुराने 3 कानूनों में बदलाव के लिए बिल पेश किया था। जिसमें राजद्रोह कानून खत्म करना भी शामिल है। इस बिल में राजद्रोह कानून को हटाकर देशद्रोह कानून करने पर बात की गई है। इसके अलावा इसे पहले से भी और अधिक सख़्त एवं कठोर बनाने पर जोर दिया गया है। शीर्ष अदालत के आदेश के बाद अब इस पूरे मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट के पाँच जजों की संविधान पीठ करेगी। तथा संविधान पीठ 1962 के केदारनाथ फैसले की भी समीक्षा करेगी। इस फैसले में IPC की धारा 124A को सही ठहराया गया था। वहीं जब सुनवाई के दौरान केंद्र ने नए प्रस्तावित आपराधिक कानून के पास होने तक इंतजार के लिए कहा तो इस पर कोर्ट ने कहा कि नया कानून आ जाने पर भी IPC की धारा 124A के तहत दर्ज मुकदमे खत्म नहीं होंगे। इसलिए, उसकी वैधता पर सुनवाई जरूरी है। बता दें कि धारा 124ए (राजद्रोह कानून) की संवैधानिक वैधता को इस आधार पर चुनौती दी गई थी कि केदारनाथ सिंह बनाम बिहार राज्य मामले में यह धारा 19(1)(ए) के दायरे से बाहर है। वहीं केंद्र ने इस मामले पर फिलहाल के लिए सुनवाई टालने की मांग की थी लेकिन अदालत ने उस मांग को ख़ारिज कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने राजद्रोह कानून की वैधता की जांच को फिलहाल स्थगित करने के केंद्र के अनुरोध को अस्वीकार कर दिया है। केंद्र सरकार ने नए बिल का हवाला देकर कहा कि नया बिल एक स्थायी समिति के समक्ष विचार के लिए लंबित है, इसलिए फिलहाल सुनवाई टाल दी जाए। इस पर सीजेआई चंद्रचूड़ ने कहा कि भले ही नया विधेयक कानून बन जाए, लेकिन नए कानून का पिछले मामलों पर कोई असर नहीं पड़ेगा।