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94K शिक्षक भर्ती: शिक्षा का स्तर भी सुधारना है और शिक्षकों को नियुक्ति भी नहीं देनी, ऐसे कैसे चलेगा सरकार?

94K शिक्षक भर्ती: शिक्षा का स्तर भी सुधारना है और शिक्षकों को नियुक्ति भी नहीं देनी, ऐसे कैसे चलेगा सरकार?
फोटो: 94K शिक्षक भर्ती: शिक्षा का स्तर भी सुधारना है और शिक्षकों को नियुक्ति भी नहीं देनी, ऐसे कैसे चलेगा सरकार?

बिहार में 94000 पदों पर शिक्षक भर्ती को लेकर उठापटक चल रही है। सभी पात्रता रखने वाले अभ्यर्थियों ने नियोजन प्रक्रिया को पास किया। मेरिट लिस्ट जारी हुई तो उसमें जगह बनाई। लेकिन सरकार ने काउंसलिंग करवाकर इन्हें नियुक्ति नहीं दे सकी। नियुक्ति के स्थान पर आश्वासन मिले। आश्वासन भी इतने कि अभ्यर्थियों को धीरे धीरे फर्क पड़ना ही बंद हो गया। 


23 जुलाई 2017 को जिसकी परीक्षा हुई वो अब तक शिक्षक नहीं बन पाए हैं। फिलहाल नियोजन फेडरेसन केस के कारण रुका हुआ है। अभ्यर्थियों के हजारों अपील के बाद भी सरकार मेंशनिंग नहीं कर रही। सुशासन बाबू की सरकार दावें तो बडे़ बड़े करती है लेकिन भर्तियों को लटकाने में भी इनका रिकॉर्ड बाकी राज्यों से कहीं अधिक बेहतर है। 

सारी पात्रताओं के बावजूद करीब एक हजार दिन बीत जाने के बाद भी नियुक्ति नहीं मिलने के कारण अभ्यर्थियों के भीतर गुस्सा होना जायज है। ये गुस्सा आंदोलन के रूप में बाहर भी आया, अभ्यर्थियों ने कभी सड़क पर तो कभी सोशल मीडिया पर आंदोलन के जरिए सरकार को घेरने की कोशिश की। सरकार पर दबाव बढ़ता तो किसी मंत्री को आगे करके आश्वासनों का लड्डू पकड़ा देती। लेकिन इसबार अभ्यर्थी आर-पार के मूड में हैं। 

प्रदेश के शिक्षा मंत्री विजय कुमार चौधरी का पूरा ध्यान हेडलाइन मैनेजमेंट पर है, ठीक सुशील मोदी की तरह। हर बार शिक्षा मंत्री जी का एक बयान आता है जिसकी हेडिंग होती है- बिहार के युवाओं के लिए अच्छी खबर, जल्द होगी बहाली। लेकिन ऐसा लगता है कि इस जल्द में देरी साइलेंट है। हो सकता है कि सरकार को लग रहा हो बिना शिक्षक के भी स्कूलों की गुणवत्ता और छात्रों का बेहतर भविष्य़ बनाया जा सकता है लेकिन सीएम नीतीश कुमार तमाम प्रोग्रामों में बोल चुके हैं कि शिक्षक के बिना शिक्षा नहीं हासिल की जा सकती। अजब हाल बना रखा है, बोलते भी हैं और नियुक्ति भी नहीं देते। 

थोड़ा सा पीछे जाएंगे तो विधानसभा चुनाव के वो वादे याद आएंगे जिसमें तेजस्वी यादव ने कहा, हम 10 लाख नौकरी देंगे उस वक्त नीतीश जी की पार्टी ने 19 लाख रोजगार देने का वादा कर दिया। गठबंधन की साथी भाजपा के नेता सुशील मोदी ने कहा था कि 1 साल के भीतर ही 3 लाख शिक्षकों की बहाली होगी। छह महीने बीतने को है लेकिन अब तक एक व्यक्ति को भी सरकारी नौकरी का नियुक्ति पत्र नहीं दिया जा सका है। यहां बात सिर्फ शिक्षक की नहीं बल्कि प्रत्येक विभागों की हो रही है। 

फरवरी में शिक्षा मंत्री ने कहा- शिक्षकों की बहाली कोर्ट के हस्तक्षेप के चलते नहीं हो पा रही, हस्तक्षेप खत्म होते ही यह बहाली होगी। ( बहाली में ब्लाइंड फेडरेसन केस का पेच फंसा है, इस केस में अगस्त 2020 में ही जबाब मांगा गया था लेकिन शिक्षा विभाग के ढुल मूल रवैया के कारण आज तक अगली सुनवाई नहीं हो पाई है।) विजय कुमार चौधरी ने फिर दोहराया की नियुक्तियां जल्द की जाएंगी। सरकार ने कोर्ट में आइल फाइल कर जल्द नियुक्ति करने की मांग की है। कुछ वक्त बाद फिर अखबारों में खबर आई कि काउंसलिंग की प्रक्रिया पूरी करने के लिए एक सप्ताह में जारी होगा शेड्यूल। 


अप्रैल में शिक्षा मंत्री ने कहा था कि 5 अप्रैल तक दिव्यांग मुद्दे पर सुनवाई पूरी कर ली जाएगी लेकिन ये बेहद शर्मनाक और निंदनीय है कि जहां विधानसभा में खड़े हो कर एक तरफ खुद शिक्षा मंत्री बोलते हैं कि बिहार में 3 लाख 15 हजार 778 शिक्षकों के पद रिक्त पड़े हैं वहीं इन्हें पूरा करने के लिए सरकार एक कदम भी नहीं बढ़ा रही। जो भी बात अब तक कही गई, उस पर अमल नहीं किया गया। सरकार के इस झूठे अश्वासन से इन बीते सालों में न जाने कितने परिवार उजड़ गए। अब इसका जवाब बिहार सरकार ही दे सकती है कि अभ्यर्थियों को अभी और कितना इंतजार करना होगा? कब तक बेरोजगारी उनके लिए अभिशाप बनी रहेगी?
 

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