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अम्बेडकर उपनाम और बाबा साहेब अम्बेडकर का योगदान !

अम्बेडकर उपनाम और बाबा साहेब अम्बेडकर का योगदान !
फोटो: अम्बेडकर उपनाम और बाबा साहेब अम्बेडकर का योगदान !
डॉ. भीमराव अम्बेडकर (Dr. Bhimrao Ambedkar), जिन्हें बाबासाहेब अम्बेडकर (Babasaheb Ambedkar) के नाम से भी जाना जाता है, एक भारतीय न्यायविद, अर्थशास्त्री, समाज सुधारक और राजनीतिज्ञ थे। इसके साथ इनको भारतीय संविधान के मुख्य वास्तुकार के रूप में उनके काम के लिए जाना जाता है। सोशल मीडिया पर पिछले कुछ दिनों से बहस छिड़ी हुई है की बाबा साहब अंबेडकर का जो सरनेम है अंबेडकर (Ambedkar) वो किसी ब्राह्मण जाति के व्यक्ति ने उनको दिया और बाबा साहब आंबेडकर सिर्फ दलितों के नेता थे जबकि ऐसा नहीं था इसके पीछे की कहानी कुछ और है।


उपनाम "अम्बेडकर" महाराष्ट्र के रत्नागिरी जिले के अंबावडे गाँव के नाम से लिया गया है जहाँ बाबा साहेब के पूर्वज रहते थे। भारत में जाति-आधारित भेदभाव के चलते डॉ. अम्बेडकर के परिवार को सामाजिक बहिष्कार और भेदभाव का सामना करना पड़ा क्योंकि वे महार जाति से संबंधित थे, जिसे उच्च जातियों द्वारा "अछूत" (Untouchables) माना जाता था। इस भेदभावपूर्ण प्रथा से मुक्त होने और शिक्षा को आगे बढ़ाने के लिए, डॉ. अम्बेडकर के पिता और परिवार के अन्य सदस्यों ने बौद्ध धर्म अपना लिया। नतीजतन, उन्होंने अपना उपनाम "सकपाल" (Sakpal) से बदलकर "अंबेडकर" (Ambedkar) कर दिया, जिसका अर्थ है "जो निडर है और अपने मन की बात कहने में संकोच नहीं करता है।" उपनाम परिवर्तन परिवार के लिए प्रतीकात्मक रूप से जाति व्यवस्था को अस्वीकार करने और एक नई पहचान को अपनाने का एक तरीका था, जो समानता और सामाजिक न्याय के लिए उनके संघर्ष का प्रतिनिधित्व करता था।


Dr. Bhimrao Ambedkar

 


डॉ बाबासाहेब अम्बेडकर किसी एक जाति समुदाय या विशेष उपनाम के हितैषी ना होकर देश के हितैशी थे। जिसका परिणाम हमें उनके देश को दिए गए योगदानों से मिलता है। - अंबेडकर ने संविधान निर्माण (Constitution Making) के दौरान विभिन्न समाजों और वर्गों के समान अधिकारों और न्याय के लिए लड़ाई लड़ी। उन्होंने अनुसूचित जाति (Scheduled Caste) और अनुसूचित जनजाति (Scheduled Tribe) को संविधान में समानता और न्याय का अधिकार दिया जो उनके लिए एक महत्वपूर्ण सामाजिक सशक्तिकरण का माध्यम बना। वे संविधान में शिक्षा, स्वतंत्रता, स्वतंत्र विचार और स्वतंत्रता के मूल्यों को समर्थन देते थे।

भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर ने अपने जीवन के 65 सालों में सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक, शैक्षणिक, धार्मिक, ऐतिहासिक, सांस्कृतिक, साहित्यिक, औद्योगिक, संवैधानिक आदि क्षेत्रों में अनगिनत कार्य करके राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उन्होंने कई ऐसे काम किए, जिन्हें आज भी हिंदुस्तान याद रखता है। हम इसी क्रम में जानते हैं कि उन्होंने राष्ट्र निर्माण में क्या क्या कार्य किए। 

सामाजिक एवं धार्मिक योगदान - 

  • मानवाधिकार (Human Right) जैसे दलितों एवं दलित आदिवासियों के मंदिर प्रवेश, पानी पीने, छुआछूत, जातिपाति, ऊंच-नीच जैसी सामाजिक कुरीतियों को मिटाने के लिए कार्य किए। 
  • उन्होंने मनुस्मृति दहन (1927), महाड सत्याग्रह (1928), नाशिक सत्याग्रह (1930), येवला की गर्जना (1935) जैसे आंदोलन चलाएं। 
  • बेजुबान, शोषित और अशिक्षित लोगों को जागरुक करने के लिए साल 1927 से 1956 के दौरान मूक नायक, बहिष्कृत भारत, समता, जनता और प्रबुद्ध भारत नामक पांच साप्ताहिक और पाक्षिक पत्र-पत्रिकाओं का संपादन किया। 
  • उन्होंने छात्रावास, नाइट स्कूल, ग्रंथालयों और शैक्षणिक गतिविधियों के माध्यम से कमजोर वर्गों के छात्रों को अध्ययन करने और साथ ही आय अर्जित करने के लिए उनको सक्षम बनाया।
  • सन् 1945 में उन्होंने अपनी पीपुल्स एजुकेशन सोसायटी (People's Education Society) के जरिए मुम्बई में सिद्वार्थ महाविद्यालय (Siddharth College) तथा औरंगाबाद में मिलिन्द महाविद्यालय (Milind College) की स्थापना की।
  • हिन्दू विधेयक संहिता (Hindu Bill Code) के जरिए महिलाओं को तलाक, संपत्ति में उत्तराधिकार आदि का प्रावधान कर उसके कार्यान्वयन के लिए संघर्ष किया।

Babasaheb Ambedkar

 

आर्थिक, वित्तीय और प्रशासनिक योगदान - 

  • भारत में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (Reserve Bank of India) की स्थापना डॉ. अम्बेडकर की रचना 'रुपये की समस्या-उसका उद्भव और प्रभाव' , 'भारतीय चलन व बैकिंग का इतिहास' और 'हिल्टन यंग कमीशन के समक्ष उनकी साक्ष्य' के आधार पर 1935 में हुई।
  • उनके दूसरे शोध 'ब्रिटिश भारत में प्रांतीय वित्त का विकास' के आधार पर देश में वित्त आयोग की स्थापना हुई। 
  • साल 1945 में उन्होंने देश के लिए जलनीति और औद्योगिकरण की आर्थिक नीतियां जैसे नदी-नालों को जोडना, हीराकुंड बांध, दामोदर घाटी बांध, सोन नदी घाटी परियोजना, राष्ट्रीय जलमार्ग, केंद्रीय जल और विद्युत प्राधिकरण बनाने के मार्ग प्रशस्त किए। 
  • साल 1944 में प्रस्तावित केंद्रीय जल मार्ग और सिंचाई आयोग (Central Waterways and Irrigation Commission) के प्रस्ताव को 4 अप्रैल 1945 को वाइसराय (Viceroy) की ओर से अनुमोदित किया गया और बड़े बांधों वाली तकनीकों को भारत में लागू करने हेतु प्रस्तावित किया।

  • Central Waterways and Irrigation Commission

     

देश की आर्थिक सामाजिक राजनैतिक मूल्यों को मजबूत करने में अपना बाबा साहब अंबेडकर का योगदान अतुलनीय है। उनकी नीतियां किसी एक विशेष समुदाय के लिए नहीं है वह देश में समानता स्थापित करते हुए हर वर्ग को बराबरी पर लाकर खड़ा करना चाहते थे।


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