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भारतीय जनसंघ के संस्थापक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 122वीं जयंती

भारतीय जनसंघ के संस्थापक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 122वीं जयंती
फोटो: भारतीय जनसंघ के संस्थापक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 122वीं जयंती
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ने भारतीय जनसंघ (Bharatiya Jana Sangh) के संस्थापक श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 122वीं जयंती पर गुरुवार को उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। इस मौके पर पीएम मोदी ने कहा कि श्यामा प्रसाद मुखर्जी के आदर्श व सिद्धांत हर पीढ़ी को प्रेरणा देते रहेंगे। प्रधानमंत्री मोदी ने एक ट्वीट में कहा, ‘महान राष्ट्रवादी चिंतक, शिक्षाविद और भारतीय जनसंघ के संस्थापक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को उनकी जयंती पर शत-शत नमन'


 डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी (Dr. Shyamaprasad Mukherjee) का जन्म 6 जुलाई, 1901 को कोलकत्ता में एक संभ्रांत परिवार में हुआ था। उनके पिता आशुतोष बाबू अपने जमाने ख्यात शिक्षाविद् थे। डॉ. मुखर्जी ने 22 वर्ष की आयु में एमए की परीक्षा उत्तीर्ण की तथा उसी वर्ष आपका विवाह भी सुधादेवी से हुआ, उनको दो पुत्र और दो पुत्रियां हुईं। वे 24 वर्ष की आयु में कोलकाता विश्वविद्यालय सीनेट के सदस्य बने।आगे की पढ़ाई के लिए  वो विदेश गए और वहां पर लंदन मैथेमेटिकल सोसायटी ने उनको सम्मानित सदस्य बनाया। वहां से लौटने के बाद डॉ. मुखर्जी ने वकालत तथा विश्वविद्यालय की सेवा में कार्यरत हो गए। डॉ. मुखर्जी ने 1939 से राजनीति में भाग लिया और आजीवन इसी में लगे रहे। उन्होंने गांधी जी व कांग्रेस (Congress) की नीति का विरोध किया, जिससे हिन्दुओं को हानि उठानी पड़ी थी।

shyama prasad mukherjee

 

अगस्त 1947 को स्वतंत्र भारत के प्रथम मंत्रिमंडल में एक गैर-कांग्रेसी मंत्री (Non Congress Minister) के रूप में उन्होंने वित्त मंत्रालय का काम संभाला। डॉ. मुखर्जी ने चितरंजन में रेल इंजन का कारखाना, विशाखापट्टनम में जहाज बनाने का कारखाना एवं बिहार में खाद का कारखाने स्थापित करवाए। उनके सहयोग से ही हैदराबाद निजाम को भारत में विलीन होना पड़ा। 1950 में भारत सरकार की अहिंसावादी नीति के फलस्वरूप मंत्रिमंडल से त्यागपत्र देकर संसद में विरोधी पक्ष की भूमिका का निर्वाह करने लगे। एक ही देश में दो झंडे और दो निशान भी उनको स्वीकार नहीं थे। अतः कश्मीर का भारत में विलय के लिए डॉ. मुखर्जी ने प्रयत्न प्रारंभ कर दिए। इसके लिए उन्होंने जम्मू की प्रजा परिषद पार्टी के साथ मिलकर आंदोलन छेड़ दिया।

 

Jawaharlal nehru

 

उन्होंने जम्मू-कश्मीर (Jammu and Kashmir) को विशेष दर्जा देने वाले संविधान के अनुच्छेद 370 के खिलाफ देशव्यापी अभियान चलाया था। उन्होंने ही कश्मीर को लेकर 'नहीं चलेगा एक देश में दो विधान, दो प्रधान और दो निशान' का नारा भी दिया था।  मुखर्जी ने 21 अक्टूबर 1951 को भारतीय जनसंघ की स्थापना की थी, जो बाद में भारतीय जनता पार्टी (Bharatiya Janata Party) बनी।

jammu and kashmir

 


तत्कालीन विदेश मंत्री अटल बिहारी वाजपेयी (Atal Bihari Vajpayee), वैद्य गुरुदत्त, डॉ. बर्मन और टेकचंद आदि को लेकर मुखर्जी ने 8 मई 1953 को जम्मू के लिए कूच किया। बिना परमिट के सीमा प्रवेश के बाद उनको जम्मू-कश्मीर सरकार द्वारा गिरफ्तार कर लिया गया। 40 दिन तक डॉ. मुखर्जी जेल में बंद रहे और 23 जून 1953 को जेल में उनकी रहस्यमय ढंग से मृत्यु हो गई।


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