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RSS, पांचजन्य और भाजपा IT Cell वालों ने कैसे देश के प्रतिष्ठित संस्थानों में कब्जा जमा रखा है?

RSS, पांचजन्य और भाजपा IT Cell वालों ने कैसे देश के प्रतिष्ठित संस्थानों में कब्जा जमा रखा है?
फोटो: RSS, पांचजन्य और भाजपा IT Cell वालों ने कैसे देश के प्रतिष्ठित संस्थानों में कब्जा जमा रखा है?

एजुकेशनल इंस्टीट्यूशन में किसी एक धर्म या एक विचार का प्रचार करने वाले लोगों की नियुक्ति क्यों की जानी चाहिए, जब शिक्षा का मतलब ही विकास और लोगों की सेवा करना होता है. ये नियुक्ति तब सही होती जब हमारा देश हिंदू राष्ट्र होता, हमारा एक ही लक्ष्य होता हिंदू धर्म का प्रचार करना. फिर विकास से कोई लेना देना न होता. लेकिन मोदी सरकार में तो पत्रकार पैदा करने वाले संस्थानों में संघ और भाजपा आईटी सेल के लोगों की नियुक्तियां की जा रही हैं. प्रसार भारती में संघ द्वारा प्रकाशित पत्रिका ‘पांचजन्य’ के एडिटर को बैठा दिया गया है. संस्कृति मंत्रालय में तो संघ से जुड़ी एक संस्कृति संगठन को घुसपैठ करा दिया गया है. अब हम बताते हैं कि संघ का किन-किन पत्रकारिता संस्थानों और विश्वविद्यालयों में घुसपैठ है...

 

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IIMC- ये देश का सर्वोच्च मीडिया संस्थान है यहां से निकले विद्यार्थी देशभर में पत्रकारिता कर रहे हैं. बड़े-बड़े मीडिया संस्थानों में कई सालों से सेवाएं दे रहे हैं. लेकिन जब से मोदी सरकार सत्ता में आई है यहां कभी यज्ञ होता है, तो कभी RSS से जुड़े लोगों का सेमिनार कराया जाता है. ऐसा क्यों न हो जब यहां के डीजी ही संघ से जुड़े रहे हों.

 

दरअसल, ये सेमिनार,  ये यज्ञ-हवन और संघ के लोगों की नियुक्तियां सिर्फ इसलिए की जाती हैं ताकि समूचे अकादमिक माहौल को RSS का माहौल बनाया जा सके. ऐसे पत्रकार तैयार किए जा सकें जो सिर्फ ये बताएं कि IAS में कैसे मुसलमानों ने घुसपैठ किया. वे हर मुद्दे में जिहाद एंगल निकाल सकें. किसी एक्ट्रेस का ह्वाट्सएप्प चैट लीक कर सकें. भारत-पाकिस्तान पर दिन भर डिबेट कर सकें.

 

वर्तमान में प्रो. संजय द्विवेदी IIMC के डीजी हैं और वे पत्रकारिता में सक्रिय रहे हैं. वे शुरु से ही भाजपा की स्टूडेंट विंग ABVP के सदस्य रहे हैं. भाजपा सरकार में उनकी काफी पकड़ मानी जाती है. बता दें कि संजय द्विवेदी ने एक किताब लिखी है जिसमें उन्होंने संघ और राष्ट्रवाद की खूब बड़ाई की है.

 

IIMC में BJP आईटीसेल वाले पढ़ाएंगे-

 

इतना ही नहीं अभी हाल ही में मध्य प्रदेश भाजपा IT सेल के पूर्व प्रमुख अनिल कुमार सौमित्र को IIMC का प्रोफेसर नियुक्त किया गया है. पिछले साल उन्होंने फेसबुक पर महात्मा गांधी को ‘पाकिस्तान का राष्ट्रपिता’ बताया था, जिस पर खूब विवाद हुआ. बाद में भाजपा ने उन्हें पार्टी से सस्पेंड कर दिया था. भाजपा ने सौमित्र के विवादित बयान पर कहा था कि सौमित्र का पोस्ट पार्टी की विचारधारा और सिद्धांतों के खिलाफ है, इससे भाजपा की छवि पर भी चोट पहुंची है. बताया जा रहा है कि 60 लोगों के इंटरव्यू के बाद सौमित्र की नियुक्ति हुई है. उन्हें 20 अक्टूबर को ही ऑफर लेटर भेजा गया था. उनकी नियुक्ति इंटरव्यू के आधार पर हुई है. नियुक्ति होने के बाद पत्रकारों ने उनसे संपर्क साधने की कोशिश की लेकिन उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया. IIMC के महानिदेशक संजय द्विवेदी ने भी इस नियुक्ति पर जवाब नहीं दिया है.

 

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माखन लाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय-

 

माखनलाल चतुर्वेदी के नाम से चल रहा ये संस्थान उनकी विचारधारा से आज बिल्कुल भटक गया है. यहां पर जब भाजपा की सरकार आती है तो विश्वविद्यालय में संघ लॉबी के लोगों को नियुक्त किया जाता है और पत्रकारिता के अनुभवी लोगों को यह कहकर खदेड़ दिया जाता है कि वे कांग्रेस लॉबी के हैं, लेफ्ट के हैं. मौजूदा समय में केजी सुरेश यहां के वीसी हैं और वे चोटी के पत्रकारिता संस्थान IIMC के डीजी रह चुके हैं. वे JNU के छात्रों और प्रोफेसरों को देशद्रोही कह चुके हैं. केजी सुरेश की संघ से नजदिकियां रही हैं. वे RSS की थिंकटैंक विवेकानंद फाउंडेशन में कार्य कर चुके हैं.

 

इससे पहले प्रो. संजय द्विवेदी MCU के वीसी हुआ करते थे. नियुक्तियों और अनियमितताओं के मामले में उन पर FIR भी दर्ज की जा चुकी है. हालांकि जब कमलनाथ की सरकार आई तो नियुक्तियों में जांच करवाया गया. जांच में पता चला कि UGC की गाइडलाइन्स को ताक पर रखकर कई प्रोफेसरों की नियुक्ति की गई है. इसमें 20 लोगों के खिलाफ मामले दर्ज किए गए. विश्वविद्यालय में हुई गड़बड़ियों की जांच के लिए एक कमेटी बनाई गई. इस कमेटी ने खुलासा किया कि 2010 से लेकर 2018 तक ABVP को 8 लाख रुपये, राष्ट्रीय ज्ञान संगम को 9.50 लाख रुपये व जम्मू-कश्मीर अध्ययन केंद्र द्वारा श्रीश्री रविशंकर के आश्रम को 3 रुपये और भारतीय वेब प्राइवेट लिमिटेड नागपुर को 46 हजार रुपये माखनलाल यूनिवर्सिटी की ओर से दिए गए थे.

 

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BHU- महामना मदन मोहन मालवीय की बगिया कही जाने वाली इस यूनिवर्सिटी की देश में एक अलग ही पहचान है. लेकिन मोदी सरकार के आने के बाद यहां पर भी संघ से जुड़े लोगों की नियुक्तियां हुईं. पूर्व वीसी जीसी त्रिपाठी ने एक इंटरव्यू में साफ-साफ कह दिया कि हां मैं RSS का ही हूं.  बीते कुछ सालों में विश्वविद्यालय में ऐसी गतिविधियां होती रहीं जिससे साफ पता चलता है कि संघ की विचारधारा को यहां बढ़ावा दिया जाता है. जैसे विश्वविद्यालय कैंपस के भीतर मौजूद एक कलात्मक नग्न मूर्ति को कुछ छात्रों ने कपड़े पहना दिए. सोचिए एक कलात्मक मूर्ति में छात्रों को नग्नता दिखाई देने लगी, वर्षों से तो ऐसे ही पड़ी थी.

 

इसी तरह वीसी गिरीश चंद्र त्रिपाठी विश्वविद्यालय के सांस्कृतिक कार्यक्रमों में ज्यादा मंचासीन रहते थे जबकि वे पूर्व में इलाहाबाद विश्वविद्यालय में इकोनॉमिक्स डिपार्टमेंट के प्रोफेसर हुआ करते थे. विश्वविद्यालय में 24 घंटे लाइब्रेरी नहीं खुल सकती. मिर्जापुर में स्थित बीएचयू साउथ कैंपस में RSS का झंडा लगाया जाता था, जब डिप्टी चीफ प्रॉक्टर ने झंडा उतरवा दिया तो उनके खिलाफ FIR दर्ज करवा दी गई. इसी तरह संस्कृत विभाग में एक योग्य मुस्लिम प्रोफेसर की नियुक्ति पर भी खूब बवाल मचा. छात्र सिर्फ इसलिए सड़क पर उतर आए क्योंकि एक मुस्लिम उन्हें कैसे शिक्षा दे सकता है. इसी तरह मैग्सेसे पुरस्कार विजेता संदीप पांडेय को बीएचयू से यह कहकर निकाल दिया गया कि वे राष्ट्रविरोधी हैं, नक्सली विचारधारा के हैं.  कुल मिलाकर ये सब RSS का एजेंडा ही था.

 

कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता विश्वविद्यालय रायपुर-

 

कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता विश्वविद्यालय में डॉ. बलदेव शर्मा की नियुक्ति पर बवाल मच गया था. दरअसल, बलदेव शर्मा आरएसएस के पांचजन्य में काम करते थे व संघ से उनका नजदीकी रिश्ता रहा है. ऐसे में उनकी नियुक्ति पर पत्रकारिता के छात्रों ने सड़क आंदोलन तक कर दिया था. विवाद बढ़ा तो वे बिना पदभार ग्रहण किए ही कैंपस से लौट गए. हालांकि तमाम विरोध के बावजूद उन्होंने अपना पदभार ग्रहण किया. फिलहाल वे ठाकरे विश्वविद्यालय के वीसी हैं. इससे पहले वे स्वदेश और पांचजन्य के लिए काम कर चुके हैं.

 

सांस्कृतिक संस्थानों में भी संघ का कब्जा-

 

इसी तरह देश के कला केंद्रों में भी संघ की जबरदस्त घुसपैठ हो गई है. इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र में सचिव पद पर सच्चिदानंद जोशी हैं, जो संघ की मराठी लॉबी में काफी मजबूत पकड़ रखते हैं. डॉ. जोशी पहले कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता विश्वविद्यालय में कुलपति हुआ करते थे. इसी तरह प्रसार भारती भर्ती बोर्ड में जगदीश उपासने को नियुक्त किया गया है. उपासने RSS द्वारा निकाली जाने वाली पत्रिका पांचजन्य के संपादक रह चुके हैं. उपासने की मां भाजपा की नेता भी रही हैं. इसी तरह संस्कृति मंत्रालय में RSS का जबरदस्त घुसपैठ है. संघ की एक सहयोगी संस्था संस्कार भारती है जो संस्कृति मंत्रालय में नियुक्ति से लेकर कार्यक्रमों तक में पूरी हस्तक्षेप करती है.

 

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सरकार चाहती है कि पत्रकारिता के पौधों में ऐसा पानी, खाद डाला जाए जो सिर्फ अनर्गल बातें करे. वो शिक्षा, बेरोजगारी, अपराध, भूखमरी, उत्पीड़न पर बोलने से पहले विदेशी कॉन्सपिरेसी खोजे. किसी घटना में PFI का लिंक खोजे. कुल मिलाकर इन्हें देश में एक ऐसी फौज तैयार करना है जो अतार्किक हो. जो रोजगार न मांग सके. जो सिर्फ राष्ट्रवाद की बातें करे. सरकार की आलोचना करने वालों को देशद्रोही घोषित कर सके. जेएनयू जैसे टॉप विश्वविद्यालयों से उठने वाली आवाजों को नक्सली आवाज घोषित कर सकें. आने वाली नस्लें कुछ सवाल न पूछ सके इसलिए BJP सरकार संघ और दक्षिणपंथी विचारधारा वाले शिक्षकों की घुसपैठ करा रही है.


सोचिए जब BJP आईटी सेल वाला पत्रकारिता पढ़ाएगा तो कैसे पत्रकार पैदा होंगे. ‘संघ की बड़ाई’ पर किताब लिखने वाला जब पत्रकारिता पढ़ाएगा तो कैसे पत्रकार निकलेंगे. क्या आईआईएमसी और एमसीयू में अब पत्रकारिता की पढ़ाई की जा सकती है.

 

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